सरकारी नौकरी वाले भी गरीबी रेखा से नीचे

यूपी जहां कुछ भी संभव है। प्रदेश में बीपीएल कार्ड बनने में हुई इस अंधेरगर्दी का खुलासा अब नये सर्वेक्षण में मृतक बीपीएल कार्ड धारकों को पृथक करने तथा नये नाम शामिल किये जाने के अभियान के दौरान सामने आयी। राज्य सरकार के निर्देश पर पांच वर्ष बाद वर्तमान में जिले भर की ग्राम पंचायतों में बीपीएल सूची का परीक्षण किया जा रहा है।
पुरानी बीपीएल सूची में शामिल मृतकों के नाम हटाये जाने के साथ ही जिन गरीब परिवारों के नाम पुरानी सूची में छूट गये थे उनके मुखिया का नाम बीपीएल सूची में जोड़ा जाना है। कौशम्बी के त्योहर गांव में जब सर्वे का कार्य आरम्भ हुआ तो जो हकीकत सामने आयी उससे कई अधिकारियों की सत्यनिष्ठ पर प्रश्न चिन्ह लग गया। बीपीएल सूची में मृतक तो नहीं पाया गया लेकिन नौ व्यक्ति ऐसे मिले जो बीपीएल सूची के मानकों की अर्हता नहीं रखते है।
बीपीएल कार्ड धारक सोहन लाल के पास खेत है। नलकूप के अलावा शहर में घर है। मनीष कुमार कृषि भूमि नलकूप के मालिक है पिता सरकारी नौकरी में हैं। हंसराज सिंह सरकारी नौकरी के साथ खेतिहर भी है। ज्ञान सिंह प्रधानाध्यापक हैं। महेश्वर सिंह सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। भगवानदास सर्राफा व्यवसायी हैं। प्रदीप कुमार पूर्व प्रधान हैं, चार पहिया गाड़ी के मालिक हैं। सोना चौधरी पूर्व प्रमुख हैं शहर में घर है। यह तो एक गांव का नमूना है। जिले भर के गांवों में बीपीएल सूची का सर्वे ईमानदारी से हुआ तो अपात्रों की लम्बी सूची प्रकाश में आयेगी जिसमें चौकाने वाले नाम उजागर होंगे।












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