चिश्ती के आंखों में खुशी के आंसू, जाएंगे पाकिस्तान

Supreme Court
दिल्ली (ब्यूरो)। सुप्रीम कोर्ट हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे पाक वैज्ञानिक मोहम्मद खलील चिश्ती ( 82) को उनके स्वदेश भेजने पर राजी हो गया है। हालांकि उनपर कई तरह के प्रतिबंध होंगे साथ ही उन्हें नवंबर तक हर हाल में भारत आना होगा। न्यायाधीश पी सदाशिवम और न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की पीठ ने चिश्ती को पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग में अपना पासपोर्ट जमा करने और दो सप्ताह के अंदर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में पांच लाख रूपये जमा करने का आदेश भी दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर चिश्ती ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा, ‘यह एक बहुत बड़ा फैसला है। हमेशा के लिए पाकिस्तान वापस जाने की मेरी उम्मीद काफी प्रबल हुई है। मेरे परिवार वालों को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। वे भी काफी खुश हैं। मेरी पत्नी मेहर मेरे लिए अल्लाह से हमेशा दुआ करती रही हैं। जब वे बात कर रहे थे तो उनके आंखों में आंसू आ गए।

पीठ के आदेश से पहले अतिरिक्त सालीसिटर जनरल मोहन पराशरन ने इस बात पर जोर दिया था कि भारत में चिश्ती के परिचित लोग उनकी तरफ से मुचलका भरें ताकि अपील पर सुनवाई के दौरान पाकिस्तानी वैज्ञानिक की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके। पीठ ने हालांकि ऐसी कोई शर्त लगाने से इंकार कर दिया। पीठ ने कहा कि चिश्ती को छोड़ा जाना उन पर लगायी गयी दो शर्तो को पूरा करने पर निर्भर करता है। इससे पहले गत चार मई को सुप्रीम कोर्ट पाकिस्तान जाने की अनुमति देने के चिश्ती के आग्रह पर सुनवाई के लिये राजी हो गया था और इस बारे में केन्द्र से उसका पक्ष पेश करने को कहा था। बीस साल पुराने हत्या के एक मामले में दोषी ठहराये जाने के बाद राजस्थान की अजमेर जेल में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे चिश्ती को सुप्रीम कोर्ट ने पिछले नौ अप्रैल को जमानत दे दी थी। शीर्ष अदालत ने उन्हें मानवीय आधार पर जमानत दी थी लेकिन अगले आदेश तक अजमेर नहीं छोड़ने को कहा था। चिश्ती को 20 साल पुराने हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा मिली हुई है। चिश्ती बीमार मां को देखने 1992 में पाकिस्तान से अजमेर आए थे। यहां उन पर पड़ोसी की हत्या का आरोप है।

गौरतलब है कि चिश्ती की बेटी ने दिसंबर 2010 में केंद्रीय गृह मंत्रालय से मुकदमे की सुनवाई जल्द करने की गुहार की थी। इसके बाद मामले की प्रतिदिन सुनवाई की जाकर 31 जनवरी 2011 को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने खलील समेत चार आरोपियों को उम्र कैद से दंडित किया। इसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली और सजा बहाल रखी गई। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है।

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