अब न्याय की चौखट पर देनी होगी 10 गुनी फीस

शीला दीक्षित ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में 1958 के बाद से कोर्ट फीस में कोई संशोधन नहीं किया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट की एक समिति ने भी दिल्ली सरकार से ई-कोर्ट फीस शुरू करने को कहा था। उन्होंने बताया कि 40 पैसे, 25 पैसे और 50 पैसे मूल्य की कोर्ट फीस अब नहीं चलती। इस वजह से भी परिवर्तन जरूरी हो गया था।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कोर्ट फीस को संकलित करने के लिए पहले यह फैसला किया गया था कि कोर्ट फीस अधिनियम, 1870 की धारा 26 में संशोधन किया जाएगा। इसका मकसद कोर्ट फीस संकलन के लिए ई-स्टांपिंग को साधन मानना था। इसके अलावा कोर्ट फीस में संशोधन के लिए अधिनियम की अनुसूची-1 और 2 में भी संशोधन करने का फैसला किया गया था।












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