सावधान! विटामिन है आपकी सेहत के लिए खतरनाक

योजना आयोग के कार्य समूह ने रिपोर्ट में इन दवाओं पर बिक्री के लिए कड़े नियम बनाने को कहा गया है। साथ ही, भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) और खाद्य संरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) पर मल्टी विटामिन, मिनरल्स जैसी दवाओं की रोग निरोधी और चिकित्सीय उद्देश्य की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, गैर जरूरी रूप से उपयोग होने वाले विटामिन, टॉनिक, कफ सिरप की धड़ल्ले से हो रही बिक्री न सिर्फ आम लोगों पर आर्थिक बोझ डाल रही है, बल्कि सेहत भी बिगाड़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सूची में शामिल आवश्यक दवाओं के प्रभाव की समीक्षा होनी चाहिए। इसके लिए औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड एक कारगर तंत्र का गठन करे।
दवा कंपनियों के पैसे कमाने के मंसूबे का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मलेरिया, टीबी जैसी बीमारियों के लिए नई दवाएं नहीं बनाई जा रही हैं। जबकि डॉक्टरों के नुस्खे पर तर्कहीन दवाएं काफी मिलती हैं। एचआईवी, टीबी, मलेरिया के उपचार के लिए सरकारी, निजी व सार्वजनिक क्षेत्रों के लिए सख्त दिशा-निर्देश तय किए जाने चाहिए। जेनेरिक दवाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए रिपोर्ट में कहा गया है।
दवाओं के आक्रामक बाजारीकरण ने दवाओं के अनावश्यक उपयोग को काफी बढ़ावा दे रहा है। अनैतिक कार्य करने वाली कंपनियों की पहचान कर उसे दंडित किया जाना चाहिए। वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को नसीहत देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि दवाओं और छूमंतर करने वाले विज्ञापनों पर शिकंजा कसने में किसी प्रकार की कोताही न बरतें। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के साथ मिलकर मंत्रालय एंटीबायोटिक नीति बनाए। साथ ही, जेनेरिक मेडिसिन के उपयोग को कोर्स में शामिल करे। डॉक्टरों के नुस्खे के ऑडिट करने के लिए कानून बनाए जाएं, ताकि दवाओं की प्रतिरोधी क्षमता को कम किया जा सके।












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