अग्नि-5 की कामयाबी के पीछे 'अग्नि पुत्री' का हाथ

केरल के अलप्पुझा जिले की रहने वाली थॉमस ने अपनी स्कूली पढ़ाई विज्ञान और गणित विषय में पूरी की। स्कूली शिक्षा के दौरान ही उनका रुझान रॉकेट और मिसाइलों की ओर था। जब कभी कोई रॉकेट लॉच होता या मिसाइल दागी जाती टेसी जिज्ञासा और आश्चर्य से भर जाती थीं। हाल ही में दिए अपने साक्षात्कार में टेसी ने कहा था, वर्ष 1985 में डीआरडीओ प्रोग्राम के तहत देशभर से चुने गए दस युवाओं में एक मैं भी थी।
उसी दिन से मिसाइलों की दुनिया मेरे लिए खुल गई थी। डीआरडीओ में कदम रखने के बाद सब कुछ बदल गया और आज मैं खुद को यहां देख रही हूं। मिसाइल मैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की शिष्या थॉमस डीआरडीओ से 1988 में अग्नि परियोजना के दौरान जुड़ीं। कोझिकोड के त्रिचूर इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक और डिफेंस कॉलेज ऑफ एडवांस टेक्नोलॉजी से एमटेक करने के बाद, उन्हें डीआरडीओ द्वारा चलाए जा रहे कोर्स गाइडेड वेपन के लिए चुना गया था।
टेसी के करियर ने उस समय उड़ान भरी जब उन्हें अग्नि-4 की वैज्ञानिकों की टीम का प्रमुख चुना गया। इसके बाद अग्नि-5 जैसी अति जटिल मिसाइल के परीक्षण की बागडोर को संभाला। देश में बढ़ते लिंगानुपात के बारे में पूछे जाने पर टेसी ने कहा, विज्ञान लिंग भेद नहीं करता। रक्षा अनुसंधान और विकास का क्षेत्र ज्ञान का क्षेत्र है। डीआरडीओ में महिलाओं की काफी संख्या है, जो अपने काम और परिवार में अच्छा संतुलन बनाए हुए हैं। उनके पति सरोज कुमार पटेल मुंबई में नौसेना अधिकारी हैं। उनके बेटे का नाम तेजस है, वह इंजीनियरिंग का छात्र है। मिसाइलों से घिरे रहने के अलावा टेसी को बैंडमिंटन खेलना और खाना पकाना बहुत अच्छा लगता है।












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