इतालवी नागरिक रिहा, विधायक को नहीं छोड़ेंगे माओवादी

माओवादियों ने 14 मार्च को दो इतालवी नागरिकों को बंधक बना लिया था। माओवादियों ने पहले ही इतालवी नागरिक क्लाउदियो कोलनक्वेलो को रिहा कर दिया था।
अपहरण के एक दिन बाद आन्ध्र उड़ीसा सीमा के विशेष जोनल समिति (ओएबीएसजेडस) ने मीडिया को भेजे एक पत्र में कहा कि हिकाका को तब तक रिहा नहीं किया जाएगा, जब तक कि चेनदा भूषणम गठबंधन के घासी एवं अन्य 30 विद्रोहियों की रिहा नहीं किया जाता। घासी पर 41 प्रमुख हिंसक घटनाओं में शामिल होने का आरोप है।
तेलगू भाषा में लिखे तीन पन्ने के पत्र में चेतावनी देते हुये कहा गया है कि यदि 30 विद्रोहियों को रिहा करने में देर की जाती है तो 37 वर्षीय विधायक को प्रजा अदालत में पेश किया जाएगा और वही उसके भाग्य का फैसला करेगी। उन्होंने मीडिया को लिखे पत्र में कहा कि कोरापुट के सांसद जयराम पंगी, कोरापुट के विधायक रघुराम पोदल, और तेपोर के विधायक रबी नारायण नंदा सभी उनकी सूची में शामिल हैं और ये सभी सत्ताशीन बीजू दल के नेता हैं।
गौरतलब है कि सरकार के सामने दोहरी समस्या खड़ी हो गयी है, क्योंकि उड़ीसा पुलिस एसोसिएशन और ओडिशा कांस्टेबल, हवलदार और सिपाही महासंघ ने चेतावनी दी है कि चेंदा भूषणम उर्फ घासी जैसे कट्टर माओवादियों की रिहा करने के किसी भी कदम का पुरजोर विरोध करने के साथ ही वे नक्सली क्षेत्र में ड्यूटी से हट जायेंगे।
घासी कम से कम 55 सुरक्षाकर्मी की हत्या के मामले आरोपी है। यह चेतावनी ऐसे समय में आयी है जब विधायक झीना हिकाका और इतालवी नागरिक पाओलो बोसुस्को के अपहर्ताओं ने नयी मांगें रख दी हैं।












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