चिश्ती के वतन लौटने का रास्ता हुआ साफ

दो दशक पुराने हत्या के मामले में उन्होंने 14 माह से अधिक समय जेल में गुजारा। जेल से रिहाई के बाद चिश्ती ने जल्द से जल्द अपने वतन लौटने की इच्छा जताई है। अस्वस्थ चल रहे चिश्ती जैसे ही अजमेर सेंट्रल जेल से बाहर निकले, भाई जमील चिश्ती, चचेरे भाई अनवर उल हक तथा अन्य लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देकर उनकी रिहाई का रास्ता साफ कर दिया था। चिश्ती ने कहा, ‘जेल से बाहर आकर मैं बेहद खुश हूं। मैं इसके लिए ईश्वर को धन्यवाद देता हूं। मेरी इच्छा अब जल्द से जल्द पाकिस्तान जाकर अपने परिजनों से मिलने की है।’ अंग्रेजी में बात करते हुए पाकिस्तान के इस वैज्ञानिक ने कहा, ‘मैं रिहाई के प्रयासों और अजमेर यात्रा के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को भी धन्यवाद देना चाहूंगा।’
जरदारी की भारत यात्रा के दौरान दोनों मुल्कों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा के एक दिन बाद चिश्ती को मानवीय आधार पर जमानत दी गई है। भारत और पाकिस्तान के कार्यकर्ता लंबे अरसे से स्वास्थ्य आधार पर उनकी रिहाई की अपील कर रहे थे। सफेद पठानी सूट और कैप पहने जेल से बाहर निकले चिश्ती ने कहा कि वे अपने वतन लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। भारतीय कैदी सरबजीत सिंह के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन हर व्यक्ति को न्याय मिलना चाहिए। गौरतलब है कि सरबजीत पिछले 22 साल से पाकिस्तान के जेल में बंद है। चिश्ती को जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हे पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने के निर्देश दिए थे। पेशे से माइक्रोबायोलॉजिस्ट चिश्ती वर्ष 1992 में अपनी अस्वस्थ मां से मिलने अजमेर आए थे। इसी दौरान वे एक विवाद में फंस गए। इस विवाद में उनके एक पड़ोसी को गोली मार दी गई जबकि उनका एक भतीजा घायल हो गया।












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