हो सकती है भारत-पाक को करीब लाने की पहल

Asif Ali Zardari
नई दिल्ली। कहते हैं हर धर्म एकता और भाईचारे की सीख देता है। शायद यह धार्मिक अनुष्‍ठान ही है, जो भारत और पाकिस्‍तान को करीब लाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति अजमेर के पीर मु‍इनुद्दीन चिश्‍ती की दरगाह पर मत्‍था टेकने आ रहे हैं। वो रविवार यानी आज अजमेर जायेंगे। उनके इस दौरे में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ भोज भी शामिल है। इस भोज में कूट‍नीतिक चर्चा भले ही नहीं होगी, लेकिन दोनों देशों के संबंधों को कैसे प्रगाढ़ बनाया जाये, इस पर जरूर बात होगी।

जरदारी के भारत दौरे की खबर आयी और ठीक उसी वक्‍त अमेरिका ने 26/11 हमले के साजिशकर्ता हाफिज सईद पर 50 करोड़ का इनाम घोषित कर दिया। बस फिर क्‍या था पूरे मीडिया और विपक्षी दलों की ओर से सरकार पर इस संबंध में बात करने का दबाव बनाया जाने लगा। सच पूछिए तो दबाव बनाना गलत है, क्‍योंकि जरदारी यहां बतौर राष्‍ट्रपति नहीं बल्कि बतौर श्रद्धालु भारत आ रहे हैं।

हमारे देश की संस्‍कृति कहती है कि अति‍थि देवो भव:। यानी भले ही वो अपनी निजी यात्रा पर आ रहे हों, लेकिन हैं तो हमारे मेहमान ही। लिहाजा प्रधानमंत्री ने उन्‍हें भोज पर आमंत्रित किया।

जरदारी की इस यात्रा को लेकर तमाम इलेक्‍ट्रानिक चैनल बार-बार सवाल उठा रहे हैं कि आखिर भारत हाफिज सईद पर क्‍यों बात नहीं कर रहा है। यहां तक भारतीय जनता पार्टी ने अपनी डिमांड में दाऊद इब्राहिम को भारत को सौंपने की मांग कर डाली है। सही मायने में देखा जाये तो ये सभी सवाल करना फिजूल है, क्‍योंकि निजी यात्रा में कूटनीतिक मुद्दों को शामिल करना गलत होगा। हम आपको बता दें कि कूटनीतिक वार्ता का नियम होता है कि अगर दो देशों को एक दूसरे सी सीधी बात करनी होती है तो सबसे पहले दोनों के विदेश सचिव मुलाकात करते हैं और उसके बाद शीर्ष नेता। और यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ, यानी अगर भारत की ओर से बिना औपचारिकता निभाये सईद का रॉकेट दाग दिया जाये तो पूरी तरह गलत होगा।

इस मुलाकात का सकारात्‍मक पहलु देखें तो कई मामले हैं, जहां भारत और पाकिस्‍तान के बीच मैत्री संबंध बहुत महत्‍वपूर्ण हैं। सबसे पहला आतंकवाद का मामला। इस मुलाकात में अगर दोनों देशों के प्रमुख अनौपचारिक ढंग से भी इस पर बात करें तो दोनों देशों के लिए मुसीबत बन चुका आतंकवाद के कुछ रास्‍ते निकल सकते हैं। दूसरा क्रिकेट 26/11 के बाद से भारत-पाकिस्‍तान के बीच एक भी द्वीपक्षीय सीरीज नहीं हुई है। इस मुलाकात में वो खेल के माध्‍यम से दोनों देशों के संबंध मजबूत करने पर बात कर सकते हैं। व्‍यापार भी एक बड़ा मुद्दा है, जो संबंधों को मजबूत बना सकता है।

खैर यह तो सब महज कयास भर हैं, सही बातें तो तब सामने आयेंगी जब दोनों देशों के प्रमुख मीडिया के सामने अपनी-अपनी बात रखेंगे। उससे पहले कुछ भी कहना जल्‍दबाजी होगी।

जरदारी के प्रतिनिधिमंडल में 40 सदस्‍य शामिल हैं, जो भारत आ रहे हैं। उनमें आंतरिक मंत्री रहमान मलिक और बेटे बिलावल भुट्टो भी शामिल हैं। वहीं भारत के टॉप कैबिनेट मंत्री, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी भी भोज में शिरकत करेंगे।

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