'ब्लैकमेल करने का अस्त्र बन जायेगा जन लोकपाल'

उनका कहना था कि वह अभी तक चुप थे क्योंकि आम तौर पर मीडिया उनसे नाराज रहती है और लोकपाल का विरोध करने वाले को भ्रष्टाचार का समर्थक मान लिया जाता है। उन्होंने कहा कि उनका स्पष्ट मत है कि लोकपाल की कोई आवश्यकता नहीं है। भ्रष्टाचार को रोकने के लिए वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था पर्याप्त है। इसे स ती से लागू करने की जरूरत है। काटजू ने कहा कि अन्ना हजारे ईमानदार हैं लेकिन उनमें वैज्ञानिक सोच नहीं है।
देश की समस्याओं को दूर करने के लिए वैज्ञानिक सोच जरूरी है। शोर शराबे से समस्याओं का हल नहीं होता। इलेक्ट्रानिक मीडिया को भारतीय प्रेस परिषद के अधिकार क्षेत्र में लाये जाने की जबरदस्त वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि इस ताकतवर संचार माध्यम को बुनियादी समस्याओं को उठाने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उन्हें दुख होता है जब इलेक्ट्रानिक मीडिया रियल्टी शो, फिल्मी सितारों के स्वयंबर, बिग बास जैसे मुद्दाविहीन कार्यक्रमों को प्रमुखता से दिखाता है। इससे बुनियादी समस्याओं से लोगों का ध्यान हट जाता है। उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति के रूप में मायावती सरकार के कार्यकाल में स्मारकों और पार्को के संबंध में दिये अपने आदेश को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान उन्होंने विपक्षी वकील से पूछा था कि क्या इसमें कानून का उल्लंघन हो रहा है।
विपक्षी वकील ने भी कानून का उल्लंघन नहीं होने की बात स्वीकारी थी। ऐसे में वह सरकार के खिलाफ कैसे आदेश दे सकते थे। उन्होंने कहा कि मीडिया क्षेत्र में कालेधन के कथित प्रयोग पर परिषद गंभीर है। परिषद की कोशिश है कि मीडिया स्वतंत्र और निष्पक्ष बनी रहे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार को छह महीने के अन्दर पत्रकार मान्यता समिति और विज्ञापन समिति के गठन का निर्देश दिया गया है।












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