सेना के राज़ अब तक छिपाये क्यों रहे वीके सिंह?

इस घटना में रिश्वत की पेशकश से भी शर्मशार पहलू यह है कि उसी व्यक्ति ने वीके सिंह से यह भी कहा था, कि आपके पहले वाले जनरलों ने भी रिश्वत ली थी और आपके बाद वाले भी लेंगे। एक कहकर उस व्यक्ति ने पहले के सारे जनरलों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस आरोप की गहराई तक जाना ही चाहिए क्योंकि यह सामान्य रिश्वत का मामला नहीं है, अगर रिश्वत ली गई है, तो वह किसी देश द्रोह से कम नहीं।
जनरल सिंह ने यह भी बताया कि ऐसे ही 7,000 वाहन पहले से ही सेना में शामिल है। अगर वाकई ऐसा है तो, देश की सुरक्षा को ताख पर रखकर सेना, भ्रष्टाचार में जड़ तक लिप्त हो चुकी है। एक सौदे के लिए करोड़ों रूपये की रिश्वत ली और दी गई होगी। अगर एक दलाल धड़ल्ले से सैन्य प्रमुख के चैम्बर में पहुंचकर उन्हें रिश्वत की पेशकश कर सकता है, इस पर यह संकेत मिलता है कि दलाल और देश द्रोही लोगो की किस कदर सेना में घुसपैठ बन चुकी है।
जनरल वीके सिंह ने दलाल को ना तो गिरफ्तार गरवाया और ना ही उसके खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज कराई। अगर जनरल वीके सिंह रिश्वत की पेशकश करने वाले को तत्काल पकड़वा देते और आज वो खुद पर फक्र करते कि उन्होंने एक देशद्रोही को सलांखों के पीछे फेंक दिया।












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