ससुर, देवर और ननद को मौत की सजा

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रमेश कुमार (द्वितीय) ने मामले को दुर्लभतम करार दिया। कोर्ट ने कहा,‘जो लोग एक बेसहारा औरत के संरक्षक हैं अगर वही उसकी हत्या कर दें तो संरक्षणदाता में विश्वास खत्म हो जाएगा। अगर अदालत भी इस मामले में खामोश रहती है, तो न्याय तंत्र ही धराशायी हो जाएगा। यह दुर्लभतम मामला है। हत्या में आरोपियों की भूमिका के संबंध में मृतका का मृत्यु पूर्व बयान सत्य और विश्वास योग्य है। उसके बयान से यह साफ है कि ससुराल वालों का रवैया सही नहीं था। संपत्ति में हिस्से को लेकर परिवार में मुकदमे चल रहे थे। यही मृतका की हत्या का मकसद है।’
पेश मामले के अनुसार, पुलिस को गोकुलपुरी इलाके में चमन पार्क के मकान नंबर बी-22, गली नंबर 3 में 22 अक्तूबर, 2009 की रात झगड़ा होने की सूचना मिली थी। पुलिस जब मौके पर पहुंची तब तक जख्मी शमा परवीन को पीसीआर जीटीबी अस्पताल लेकर जा चुकी थी। पुलिस ने मौके से एक माचिस, दो जली हुई तीलियां, पीड़िता के जले हुए कपड़े और प्लास्टिक की बोतल बरामद की थी।
अपने बयान में उसने कहा कि उसका ससुर गुलबेग और देवर जुल्फिकार उसे रात तकरीबन 2.30 बजे मकान की दूसरी मंजिल से पहली मंजिल पर ले गए। मकान की दूसरी मंजिल पर वह अपने दो मासूम बच्चों के साथ अकेली रहती है। वहां पर इन लोगों ने मेरे ऊपर मिट्टी का तेल डाला और आग लगा दी। पुलिस को दिए बयान में शमा के पति सरफराज ने कहा कि वह अपने परिवार से अलग अपनी पत्नी के साथ पिता के मकान में ही दूसरी मंजिल पर साथ रहता था।












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