आईएम के निशाने पर अयोध्या फैसला सुनाने वाले जज

Indian Mujahideen
लखनऊ। मध्य प्रदेश में पिछले दिनों पकड़े गए इण्डियन मुजाहिददीन व सिमी के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पूछताछ में बताया था कि उनका निशाना वह न्यायाधीश हैं जो अयोध्या मामले में निर्णय देने वाले हैं। आतंकवादियों के पास से हिन्दू पक्ष की पैरवी करने वाले वकीलों के फोटो भी मिले हैं यह सब सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि न्यायाधीशों को विशेष सुरक्षा दी जाए। इस निर्देश पर तीनों जजों को जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गयी है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अयोध्या के विवादित परिसर के मालिकाना हक का फैसला करने वाले न्यायाधीशों तथा हिन्दू पक्ष के वकीलों को विशेष सुरक्षा दिए जाने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह और न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने हिन्दू पक्ष की वकील रंजना वाजपेयी की ओर से दाखिल याचिका पर यह निर्देश दिया। खंडपीठ ने कहा राज्य सरकार दिये आदेश के पालन के बारे में 19 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में की गयी कार्यवाही का भी ब्योरा दे।

वकील रंजना बाजपेयी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि मध्यप्रदेश के आतंकवादी निरोधक दस्ते ने इंडियन मुजाहिदीन और सिमी के चार आतंकवादी पकडे थे। इन आतंकवादियों के पास से अयोध्या के मालिकाना हक की पैरवी कर रहे हिन्दू पक्ष के वकीलों की फोटो मिली थीं जो शंका पैदा करती हैं कि हो न हो यह आतंकवादी इन वकीलों को कोई हानि पहुंचाना चाहते थे। पुलिस ने जब पकड़े गए आतंकवादियों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्हें अयोध्या के मालिकाना हक का फैसला सुनाने वाले न्यायाधीशों और हिन्दू पक्ष के वकीलों को मारने के निर्देश दिये गये हैं।

यह बात पता चलते ही सभी खुफिया एजेंसियां हरकत में आ गयीं तथा वकीलों व न्यायाधीशों की सुरक्षा बढ़ाए जाने पर विचार विर्मश होने लगा। इधर वकीलों को जैसे ही इस बात की जानकारी हुई उन्होंने न्यायालय में सुरक्षा को लेकर याचिका दायर कर दी। अदालत में आज गृह विभाग के प्रमुख सचिव भी उपस्थित हुये। उन्होंनें खंडपीठ को बताया कि मालिकाना हक का फैसला सुनाने वाले तीनों न्यायाधीशों को जेड श्रेणी की सुरक्षा दी जा चुकी है। हिन्दू पक्ष की वकील रंजना वाजपेयी को भी एक गनर और एक शैडो दिया गया है। खंडपीठ ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव को लखनऊ पीठ की सुरक्षा का भी पुख्ता इन्तजाम करने का आदेश दिया ताकि किसी भी गड़बड़ी की आशंका को समाप्त किया जा सके। ज्ञात हो कि लखनऊ खंडपीठ ने मालिकाना हक का फैसला 30 सितम्बर 2010 को सुनाया था।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+