समय-समय पर दागदार होता रहा है सेना का दामन

वाहनों की खरीद फरोख्त मामले में आर्मी चीफ को 14 करोड़ की रिश्वत की पेशकश ने राजनीतिक सरगर्मी को बढ़ा दिया है। सड़क से लेकर संसद तक सिर्फ इस बात की ही चर्चा है कि आर्मी चीफ को रिश्वत पेश करने की हिम्मत किसने की और अगर ऐसा हुआ तो चीफ ने उसे गिरफ्तार क्यों नहीं करवाया? खैर इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दे दिये गये हैं और जांच जारी है। मालूम हो कि यह सेना और भ्रष्टाचार के संबंध की पहली वारदात नहीं हैं इससे पहले भी कई ऐसे मामले उजागर होते आये हैं जिसने यह साबित किया है कि भारतीय सेना भ्रष्टाचार के दलदल में किस कदर धंसती जा रही है। तो आईए पूर्व में सेना के दामन पर लगे दाग के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं।
जीप घोटालाः आजादी के बाद भारतीय सेना में हुआ यह पहला घोटाला था। 1948 में हुए इस घोटाले की खासा चर्चा रही थी। आरोप है कि आजादी के बाद पाक से युद्ध के दौरान इस घोटाले में नियम कायदों को ताक पर रख दिया गया। इंग्लैंड में भारत के उच्चायुक्त कृष्ण मेनन ने एक विदेशी कंपनी से सेना की जीप खरीदने के लिए 80 लाख का अनुबंध किया। कुल 155 जीपें खरीदी गईं और सबसे अहम बात ये रही कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस सौदे को हरी झंडी दी थी।
बोफोर्स घोटालाः बोफोर्स घोटाले जब सामने आया उस समय ही साबित हो चुका था कि भारतीय सेना के अंदर दलाल किस कदर अपनी पैठ बना चुके हैं। 1980-1990 के बीच हुए इस घोटाले में 63 अरब रुपये की बोफोर्स डील पर 24 मार्च 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने हस्ताक्षर किया था।। इसके तहत राजीव गांधी सरकार और स्वीडन की एबी बोफोर्स के बीच 410 हॉवित्जर तोपों की सप्लाई को लेकर सौदा हुआ था। गौरतलब है कि क्वात्रोची इटली का व्यापारी है, जिसे सीबीआई ने बोफोर्स घोटाले का आरोपी बनाया था। वो राजीव गांधी और सोनिया गांधी के सबसे नजदीकी व्यक्तियों में रहा है। क्वात्रोची पर आरोप था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में बोफोर्स तोपों के सौदे के दौरान उसने प्रमुख बिचौलिये के रूप में 64 करोड़ रूपए की दलाली की थी।
बराक मिसाइल घोटालाः ये घोटाला सन 2001 में इजराइल के साथ बराक मिसाइल खरीद को लेकर था। इस घोटाले में समता पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष आर के जैन, जॉर्ज फर्नांडीज, जया जेटली और नेवी के एक अधिकारी सुरेश नंदा का नाम सामने आया। आर के जैन को गिरफ्तार भी किया गया।
ताबूत घोटालाः सेना ने 1999-2000 में 1.25 लाख रुपए प्रति ताबूत और 4250 रुपए प्रति बॉडी बैग्स के बेहद ऊंचे दाम पर खरीदी की थी। इससे सेना को 89.76 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।
स्कॉर्पियन डील घोटालाः 2005 में भारत मे घूसखोरी का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया जिसमें जहाज बनाने वाली कंपनी स्कॉर्पियन पर आरोप लगा कि उसने सरकार के नुमाइंदों को 500 करोड़ रुपए दिए।
राशन घोटालाः सियाचिन और जम्मू-कश्मीर के अन्य पहाड़ी इलाकों में तैनात जवानों के राशन की खरीद में भारी गड़बड़ी पाई गई थी। फौजियों को बेकार मीट सर्व किया गया। करोड़ों रुपये के इस घोटाले में 1000 मीट्रिक टन घटिया मसूर दाल की भी खरीद की गई। कैग की रिपोर्ट में कहा गया कि सैनिकों को घटिया दर्जे का राशन मुहैया कराया जाता है। इस रिपोर्ट में कहा गया कि उत्तरी कमान और पश्चिमी कमान के कुछ भागों में आटा, चीनी, चावल, चाय, दाल, खाद्य तेल और किशमिश को उनकी सामान्य ईएसएल की समाप्ति के छह से 28 महीनों बाद भी उपभोग किया गया था।
आदर्श सोसायटीः मुंबई के कोलाबा में कथित तौर पर नौसेना की महंगी ज़मीन पर घोटाला करके 31 मंजिली इमारत खड़ी कर ली गई। यह सोसायटी कारगिल युद्ध के शहीदों की विधवाओं और उनके परिजनों के लिए था लेकिन इसे अफरसशाहों, सैन्य अधिकारियों के सम्बंधियों व अन्य को आवंटित कर दिया गया था। इसके निर्माण में पर्यावरणीय कानूनों का भी उल्लंघन किया गया था।
इसके अलावा भी कई ऐसे घोटाले हैं जिनका जिक्र यहां नहीं किया गया है। उदाहरण के तौर पर आपको बता दें कि दूध घोटाला, बुलेट प्रूफ जैकेट घोटाला और कैंटिन में धांधली भी सुर्खियों में रही और भारतीय सेना के दामन को दागदार किया। खास बात यह है कि एक तरफ जहां घोटाले हैं वहीं दूसरी तरफ सियासत, बीच में अगर कुछ रह जाता है तो वह है भारतीय सेना का भविष्य। आर्मी चीफ वीके सिंह पर घोटालों का आरोप तो महज एक कड़ी है मगर गंभीर मुद्दा यह है कि घेटालों और भ्रष्टाचार के बीच फंसी भारतीय सेना का भविष्य क्या होगा?
इस खबर पर आपकी क्या राय है? नीचे दिये कमेंट बाक्स में जरूर लिखें।












Click it and Unblock the Notifications