अखिलेश की कैबिनेट में छह दागी भी
कैबिनेट मंत्री का पद पाने वाले रघुराज प्रताप सिंह ऊर्फ राजा भैया का श्री यादव ने हालांकि बचाव किया और कहा कि उनके खिलाफ मुकदमें बसपा की सरकार ने किये थे जो राजनीति से प्रेरित थे लेकिन दुर्गा प्रसाद यादव, पारसनाथ यादव, बलराम यादव, वकार अहमद शाह और राजा अरिदमन सिंह पर आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। इनमें पारसनाथ यादव रूपये लेकर सवाल पूछने के भी दोषी पाये गये थे।
लोकसभा के पिछले चुनाव में वह जौनपुर सीट से बसपा के धनंजय ङ्क्षसह से पराजित हो गये थे। रघुराज प्रताप सिंह भाजपा की गठबंधन से बनी सरकार में कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह के भी मंत्रिमंडल में थे। बसपा प्रमुख मायावती ने रघुराज प्रताप सिंह की संपत्ति और तालाब को जब्त कर लिया था। कैबिनेट मंत्री बलराम यादव का नाम मुलायम सिंह यादव की पिछली सरकार में आयुर्वेद घोटाले में आया था।
मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव हिस्ट्रीशीटर हैं और उनके खिलाफ हत्या के कई मामले लंबित हैं। मंत्री पारसनाथ यादव के खिलाफ भी हत्या का मुकदमा चल रहा है। वकार अहमद शाह पर भी कई आपराधिक मामले चल रहे हैं। भाजपा के शासनकाल में मंत्री रहे राजा अरिदमन सिंह आगरा के बाह क्षेत्र से चुने गये हैं। चुनाव के बाद उनके खिलाफ बसपा के एक कार्यकर्ता की हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ है। इस बीच भारत की क युनिस्ट पार्टी और माक्र्सवादी लेनिनवादी ने रघुराज प्रताप सिंह को मंत्री बनाने का विरोध किया है।
भाकपा (माले) के राजय सचिव सुधाकर यादव के कहा कि लगता है कि सपा ने अपनी पिछली गलतियों से सबक नहीं लिया है। अखिलेश यादव ने रघुराज
प्रताप सिंह जैसे लोगों को मंत्री बनाकर अपने चुनावी वायदों के अनुरूप शुरूआत नहीं की है। यह राज्य के लिये शुभ संकेत नहीं है। उन्होंनें कहा कि रघुराज प्रताप सिंह सपा की पिछली सरकार में भी मंत्री थे और उनके विभाग में करोड़ों रूपये का खाद्यान्न घोटाला हुआ था जिसकी सीबीआई से जांच चल रही है।













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