उत्तराखंड में कांग्रेसी परंपरा के खिलाफ विद्रोह, 17 विधायक रावत के साथ

कांग्रेस हाईकमान के दो टूक जवाब के बाद अब केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री हरीश रावत पर उनके समर्थकों ने ‘एकला चलो’ का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। शपथ लेने के लिए कांग्रेस के 32 विधायकों में से मात्र 15 के ही विधानसभा पहुंचने से भी हरीश रावत समर्थकों के हौसले बुलंद हैं। रावत समर्थक सभी विधायक भूमिगत हो गए हैं। उत्तराखंड का विवाद वास्तव में कांग्रेस हाईकमान के लिए गले की फांस बन गया है। कांग्रेस के मात्र 15 विधायकों के ही शपथ लेने से अब मध्य प्रदेश के सुरेश पचौरी का उत्तराखंड से राज्यसभा में पहुंचना आसान नहीं दिख रहा है। राज्यसभा के 19 मार्च को चुनाव हैं और कांग्रेस ने उन्हें उत्तराखंड से उम्मीदवार घोषित किया है। स्थिति अपने पक्ष में भांपते हुए भाजपा भी अपना उम्मीदवार उतारने की सोच रही है। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि यदि परिस्थितियां जीतने की बनती हैं तो भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति शुक्रवार की बैठक में इस बारे में फैसला कर सकती है। खास बात यह है कि पचौरी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की चयन प्रक्रिया के दौरान विजय बहुगुणा के लिए लॉबिंग कर रहे थे। इसलिए भी पचौरी से रावत समर्थक नाराज हैं।
इधर, कांग्रेस हाईकमान से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद रावत समर्थक विधायक अज्ञात स्थान को चले गए हैं। अब वे रावत पर कांग्रेस से अलग रास्ते पर चलने का दबाव बनाने में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक रावत समर्थकों ने अलग पार्टी का नाम ‘उत्तराखंड कांग्रेस’ सुझाया है। देशभर में जिस तरह से क्षेत्रीय दल लगातार विस्तार कर रहे हैं उसी से रावत समर्थक भी अलग पार्टी बनाने की सोचने लगे हैं। इधर, उत्तराखंड में कांग्रेस के दो बड़े नेता इंदिरा हृदयेश व हरक सिंह रावत भी हरीश के साथ खड़े हैं। हरक सिंह तो दिल्ली में ही डटे हैं। शपथ लेने वाले 15 विधायकों में से दो प्रीतम सिंह और सरिता आर्य भी हरीश गुट से हैं। शपथ लेने के बाद वे दिल्ली आ रहे हैं। हरीश रावत को उनके समर्थकों ने बृहस्पतिवार को भी संसद नहीं जाने दिया।












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