जिंदगी से मिली हार, बंद हुई फलक की पलक

AIIMS
दिल्ली (ब्यूरो)। आखिरकार नन्ही परी फलक मौत के खिलाफ जंग में हार गई। कई बार लगा कि वह मौत को हरा देगी, लेकिन आखिरकार मौत हर्ट अटैक के रुप में आई। एम्स ट्रॉमा सेंटर में 60 दिनों से ज्यादा समय तक भर्ती रही फलक के लिए टि्वटर पर शोक संदेश की लाइन लग गई है। इसी से समझ सकते हैं यह नन्ही परी किस कदर लोकप्रिय हो गई थी।

59 दिनों तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद फलक ने मौत से हार मान ली। एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती फलक को अचानक दिल का दौरा पड़ा और बृहस्पतिवार की रात 9 बजकर 40 मिनट पर उसने अंतिक सांस ली। फलक की मौत से करोड़ो लोगों को सदमा पहुंचा है। ट्रामा सेंटर प्रमुख प्रो.एम.सी.मिश्रा ने मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि फलक का आज पोस्टमार्टम किया जाएगा। डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ दिनों से बच्ची की सेहत नॉर्मल होने लगी थी। अचानक देर रात उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। बच्ची को 18 जनवरी को 14 साल की एक लड़की अस्पताल में लेकर आई थी। बच्ची के सिर पर गंभीर चोटें थीं। शरीर पर काटने के निशान थे। दोनों हाथों में फ्रैक्चर था। अस्पताल में उसे दो बार हार्ट अटैक भी आया था। कई बार उसे वेंटिलेंटर पर रखना पड़ा था।

फलक की मौत से एम्स के डॉक्टर सदमे में हैं। पिछले कुछ दिनों में फलक की सेहत में थोड़ा सुधार हुआ था। डॉक्टरों को फलक से खास लगाव हो गया था। उन्होंने बताया कि हम फलक को लेकर पूरे वार्ड में घुमाते थे और उसके साथ खेलते थे। एम्स के डॉक्टर और न्यूरो सर्जन दीपक अग्रवाल ने बताया कि फलक की मौत से हम बेहद सदमे में हैं। हर कोई उसके बारे में पूछता था। फलक की हेल्थ सुधरने से हमें उम्मीद जगी थी। एम्स के स्टाफ का कहना है कि वे फलक को अपनी बच्ची की तरह मानने लगे थे।
दो वर्षीय फलक को 18 जनवरी को गंभीर स्थिति में एम्स ट्रामा सेंटर में दाखिल किया गया था। फलक के सिर में गंभीर चोटें थी और चेहरे पर दांत काटने के कई निशान थे। उसका हाथ व पैर टूटे हुए थे। जिसके कारण प्लास्टर करना पड़ा था। गंभीर हालत रहने के कारण उसे आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया। दो दिनों बाद फलक की हालत में थोड़ा सुधार होने पर उसकी सर्जरी की गई। पहली सर्जरी के बाद उसकी हालत बेहतर हुई और डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर से हटा दिया। लगभग आठ घंटे तक वेंटिलेटर से हटाने के बाद स्थिति बिगड़ने लगी और फिर उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

सर्जरी दर सर्जरी होने के कारण फलक में संक्रमण काफी फैल गया। एम्स ट्रामा सेंटर के डॉक्टरों ने छह सर्जरी कर उसके सिर में बढ़ने वाले तरल पदार्थ को निकालने के लिए पाइप का सहारा लिया। इसमें काफी कामयाबी मिली और डॉक्टरों में उत्साह बढ़ा। धीरे धीरे संक्रमण होता गया और स्थिति में सुधार होने के बाद 2 मार्च को डॉक्टरों ने फलक को शिशु वार्ड में शिफ्ट कर दिया। तब से उसका इलाज वार्ड में ही चल रहा था। इस कामयाबी से डॉक्टरों ने यह घोषित कर दिया कि फलक अब खतरे से बाहर है और उसकी जिंदगी सुरक्षित है। ट्रामा सेंटर के प्रमुख प्रो.मिश्रा का कहना है कि शाम तक उसकी हालत ठीक थी, लेकिन अचानक दिल का दौरा पड़ा और उसकी मौत नौ बजकर 40 मिनट पर हो गई।

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