सपा के चुनावी वादों का खर्च 90 हजार करोड़
आपको बताते चले कि 2011 में इंटर 15 लाख 90 हजार छात्र ने पास किया, और हाईस्कूल 22 लाख 93 हजार बच्चों ने पास किया था। अगर हम लैपटाप का दाम 10,000 रुपए और टेबलेट का दाम 2000 रुपए भी लगाते है तो भी हर साल राज्य सरकार पर 20 हजार करोड़ का खर्च आएगा।
किसानों और बुनकरों को मुफ्त बिजली देने की बात की गयी थी जिससे राज्य सरकार हर साल लगभग 1700 करोड़ का बोझ पडे़गा। सरकार ने अजान के समर्थन मूल्य में 50 फीसदी बढ़ोत्तरी करने का भी वादा किया है जिससे हर साल 6 हजार करोड़ खर्च होगा किसानों के 50 हजारे करोड़ कर्ज मूल्य माफ करने पर हर साल 11 हजार करोड़ का खर्च आएगा। मुफ्त सिचाई में लगभग 600 करोड़ रूपये खर्च होगा।
25 साल से ज़्यादा उम्र के बेरोजगारी भत्ता, 8 वी तक के छात्रों को मुफ्त किताबे, लड़कियों को स्नातक तक मुफ्त शिक्षा, पांच लाख तक की सालाना आमदनी वालों को बच्चों की फीस में छूट, वकीलों के लिए पेंशन योजना, किसानों के लिए चार फीसदी ब्याज पर कर्ज देना, 65 साल से ज्यादा उम्र के किसानों को पेंशन, वकीलों और किसानों का 5 लाख का इंश्योरेंस, ठेले गुमटी लगाने के लिए पक्की दुकाने आदि वादे सपा ने किए है।
अगर उत्तर प्रदेश के सरकारी खजाने की तरफ देखें तो राज्य का राजाकोषीय घाटा बढ़ता ही जा रहा है। सपा ने वादे तो कर दिए लेकिन इन योजनाओं के लिए पैसे जुटाने के लिए सपा के पास कोई योजना नहीं है। सपा के कुल वादों में लगभग 90 हजार करोड़ रूपये का सलाना खर्च आएगा। कही वादों के चक्कर में प्रदेश सरकार राज्य को कर्ज के बोझ से लाद न दे।
पहले से चल रही योजनाए और सपा के वादे की योजनाओं का खर्च कहां से आएगा, शायद इसका पता ना तो सरकार को है और ना ही जनता को













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