अगर छह तीव्रता से भूकंप आया तो भारत में कयामत

Earthquake
दिल्ली (ब्यूरो)। दिल्ली और उसके आस-पास रियेक्टर स्केल पर 6 से ऊपर का भूकंप आया ऐसी तबाही आएगी कि कयामत ही समझ लीजिए। इसकी वजह है कि दिल्ली में 90 फीसदी से ज्यादा बिल्डिंग रियेक्टर स्केल पर 6 से ऊपर के ऊपर के भूंकप झेलने की झमता नहीं है। उत्तर पूर्वी दिल्ली का और भी बुरा हाल है। यहां 97 फीसदी मकान गिर जाएंगे.

उत्तर पूर्वी दिल्ली व दक्षिण दिल्ली में भूकंप का प्रभाव सबसे अधिक रहेगा। रेतीली व गिली मिट्टी में मकानों को सबसे अधिक नुकसान होता है। इतना ही नहीं जनगणना 2001 में घरों के सर्वे में इस्तेमाल मैटिरियल को आधार बनाकर स्टडी एनडीएमए के सदस्य हर्ष गुप्ता ने अध्ययन किया है। उनका कहना है कि दिल्ली के 92 फीसदी मकान ऐसे हैं परंपरागत तरीके से बिना कंक्रीट-सरिये रेनफोर्स (बंधन) के बनाए गए हैं।जनगणना में उत्तर पूर्वी दिल्ली का आबादी घनत्व सबसे अधिक 37,346 व्यक्ति प्रति वर्ग मीटर है। अनाधिकृत कालोनियों की संख्या भी यहां अधिक है। यहां के 97 फीसदी मकान तेज भूकंप की दशा में अतिसंवेदनशील श्रेणी के हैं। अनियोजित विकास और बिना मानक के बने यहां के मकानों के कारण जान-माल का सबसे अधिक नुकसान यहीं होगा। जोन-4 में आने वाले एनसीआर की 60-70 फीसदी आबादी गैर नियोजित मकानों में रहती है। इन मकानों को गिराकर नए मकान नहीं बनाए जा सकते इसलिए अलग-अलग तरह के रेट्रोफिटमेंट की जरूरत है। हर्ष गुप्ता ने रिपोर्ट में कहा है कि अगर एनसीआर में 8 तीव्रता का भूकंप आया तो घनी आबादी, अनाधिकृत निर्माण, असुरक्षित कालोनी व गीली मिट्टी वाले क्षेत्र में बहुत अधिक नुकसान होगा।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट के पॉलिसी एवं प्लानिंग डिविजन हेड प्रो. संतोष कुमार बताते हैं कि यह क्षेत्र भूकंप प्रभावित हैं। कमजोर मकान एवं ऊंची इमारतों की पहचान करके रेट्रोफिटमेंट की जरूरत है। यमुना किनारे दिल्ली व नोएडा क्षेत्र में जमीन का निचला सतह लिक्विड जैसा है। जमीन पर मकानों का भार बढ़ रहा है। ऐसे में मकान गैर नियोजित, बिना नक्शा पास कराए व भूकंप रोधी नियमों की अनदेखी करके बने मकान जान के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। भूकंप से धरती साल भर हिलती रहती है।

रिपोर्ट के अनुसार विश्व में ग्रेट श्रेणी(रियेक्टर स्केल पर 8 से अधिक) भूकंप साल में एक बार, मेजर(7 से 7.9) के 18, स्ट्रॉक (6 से 6.9) 120, मध्यम(5 से 5.9तीव्रता) के 800 और स्लाइट श्रेणी(4 से 4.9 तीव्रता) के 6200 बार, माइनर(3 से 3.9 तीव्रता) 49 हजार बार धरती हिलती है। इतना ही नहीं रियेक्टर स्केल पर 2.9 से नीचे दैनिक 1 हजार बार धरती हिलती है। भूकंप के झटके एनसीआर को हिला गए। बहुत दिनों बाद दिन में आए भूकंप को लोगों ने महसूस ही नहीं किया बल्कि देखा! दोपहर को कार्यालयों में लंच की तैयारी में जुटे लोग अचानक मेज पर रखा गिलास या कुर्सी हिलती देखकर वहां से बाहर निकले। भूकंप इतनी देर रहा कि एक दूसरे को बता सके कि देखो भूकंप आया है। दफ्तर से बाहर निकलते ही परिजनों को फोन करने में जुट गए।

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