हम मीडियावाले किसी को भी झटक सकते हैं...

जैसे कि कहा गया है, " जब तक शेर बोलना नहीं सीखता, तब तक शिकारी इतिहास लिखते रहते हैं”। यह सही समय है मेरे पसंदीदा नेता नरेंद्र मोदी, गुजरात के शेर जो 2012 में दहाड़ेंगे( क्योंकि मैं अपनी मातृभूमि को पुनर्जीवित होते देखना चाहता हूं, और वो केवल नरेंद्र भाई ही कर सकते हें। हालांकि यह लेख विशेष रूप से उन घटनाओं पर आधारित है, जिनमें मीडिया ने इस महान नेता व सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री को लक्ष्य बनाया और जिन्हें मैं स्मरण करता हूं, जब 2002 से लेकर अब तक के समय की ओर देखता हूं।
[न्यूयॉर्क में एक व्यक्ति ने अखबार खरीदा, उसका पहला पेज पढ़ा और अखबार को कूड़े में फेंक दिया। अखबार के स्टॉल्स पर ऐसे मंजर आप आये दिन देखने को मिलने लगे। एक दिन अखबार विक्रेता ने एक आदमी से पूछा लोग सिर्फ पहला अखबार ही क्यों पढ़ते हैं। इस पर आदमी ने जवाब दिया कि वो सिर्फ पहला पन्ना निधन की सूचना के लिए पढ़ते हैं। विक्रेता ने कहा कि शोक संदेश तो अंतिम पृष्ठ पर है पहले पृष्ठ पर नहीं। विक्रेता ने कहा जवाब बेवकूफ बनाने वाली खबरें, जो मुझे पसंद हैं, वो पहले पेज में हैं। (विक्रेता रूसवेल्ट की ओर इशारा करते हुए बोला)] मेरी इच्छा न्यूयॉर्क के व्यक्ति से अलग है। मैं शुभकामनाएं और शोकसंदेश दोनों प्रकार की खबरें प्रथम पृष्ठ पर ही देखना चाहता हूं। शुभकामनाएं जब सुप्रीम कोर्ट नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देगा और शोक संदेश जब धर्मनिर्पेक्ष और वामपंथी ब्रिगेड पूरी तरह बुझ जाएंगे।
जैसा कि पाखीवाला ने कहा है, “आदमी जो सोचता है उसमें वही रंग होते हैं जिनमें वो विश्वास करता है और आदमी उसी पर विश्वास करता है जो वो अनुभव करता है”। मैं दृढ़ता के साथ मानता हूं कि नरेंद्र मोदी सिर्फ गुजरात के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री नहीं हैं, बल्कि पूरे भारत में अब तक के सर्वश्रेष्ठ सीएम हैं, जो गुजरात के विकास के लिए 24X7 काम करते हैं और मैं इस बात पर विश्वास करता हूं, क्योंकि मैंने यहां की बेहतरीन गवर्नेन्स में यह अनुभव किया है।
27 फरवरी को जैसे ही सूर्यास्त होगा, मीडिया और भारतीयों के धर्मनिपेक्ष गुट गुजरात दंगे की 10वीं वर्षगांठ पर अपने-अपने विचार लेकर खड़े हो जायेंगे। वही दंगे जो 2002 में दुर्भाग्यवश गुजरात व भारत के कुछ हिस्सों में हुए थे। सभी बातों के लिए मंच पूरी तरह तैयार है। जैसा कि हम जानते हैं कि कोर्ट के आदेश के बावजूद तथाकथित आरोप लगाये जाना जारी हैं।
फिर भी यहां मैं उन चीजों का वर्णन कर रहा हूं, जो मैंने पिछले 10 साल में अनुभव कीं। चलिये बात करते हैं उन घटनाओं को जो 2002 से अबतक मीडिया द्वारा घटित हुई।
1. जैसा कि मैंने कुछ दिन पहले ट्वीट किया था कि गोधरा नरसंहार के तुरंत बाद नरेंद्र मोदी ने बिना किसी इंतजार के संवेदनशील इलाकों में तैनात करने के लिए सेना बुला ली थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि सर्किट हाउस में नरेंद्र मोदी ने प्रेसवार्ता बुलाकर राज्य में शांति व्यवस्था बनाये रखने की अपील की थी। यह अपील बार-बार दूरदर्शन पर प्रसारित की गई। वहीं हमारे धर्मनिर्पेक्ष मीडिया चैनल क्या कर रहे थे? अपने स्टूडियो को फिल्मिस्तान में तब्दील कर ये लोग एक "गुस्सैल” भूत की तरह चिल्ला रहे थे। बिना किसी नियम को जाने-बूझे चैनल पर चर्चाएं शुरू हो गईं, जबकि नरेंद्र मोदी अपनी अपील में बार-बार कह रहे थे कि बदले के बदले बदला नहीं लेना चाहिये। लेकिन दुर्भाग्यवश इसे किसी ने रिपोर्ट नहीं किया।












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