केजरीवाल का 'ड्रामा' और वोट का 'पंचनामा'
लेकिन केजरीवाल लौटना सफल नहीं हो सका। पहले तो उन्हें मतदान केंद्र पर विरोध का सामना करना पड़ा फिर वोटिंग लिस्ट में नाम नहीं होने की वजह से वे वोट भी नहीं डाल सके। इस बवाल की शुरुआत हुई उस वक्त, जब सुबह-सुबह केजरीवाल गोवा के लिए निकल रहे थे। गाजियाबाद में मंगलवार को वोटिंग हो रही है और केजरीवाल बिना वोट दिए ही एयरपोर्ट पहुंच गए।
लोगों से नागरिक अधिकारों की अपील करने वाले केजरीवाल वोटिंग के दिन ऐसे ही निकल जाएं, ये बात सुर्खियों में आ गई। एयरपोर्ट पर उन्होंने कहा था कि उनके परिवार के लोग वोट करेंगे लेकिन उन्हे गोवा में पहले से तय बैठक में हिस्सा लेना है। हालांकि विवाद के बाद उन्होंने गोवा में होने वाले कार्यक्रमों को रद्द कर दिया।
अब सवाल यह उठता है कि पूरे देश की जनता को अपने अभियान के माध्यम से जागरुक करने और आजादी की दूसरी लड़ाई का बिगुल फूंकने वाले टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल ने मत डालने से ज्यादा गोवा जाना जरुरी समझा। अगर यह मान लिया जाये कि केजरीवाल का गोवा जाना बहुत जरुरी था तो वह सुबह सात बजे भी मत का प्रयोग कर सकते थे। खैर यह बात अलग थी कि उनका नाम वहां नहीं था। मगर जिस तरह केजरीवाल अपने मत का प्रयोग किये बिना एयपोर्ट गये उससे साफ जाहिर हो रहा है यह एक स्क्रिप्टेड स्टोरी थी। सीधे शब्दों में कहें तो यह अरविंद केजरीवाल का 'वोटिंग ड्रामा' था जिससे कहीं ना कहीं एक वोट का पंचनामा हो गया।
जनता से एक सवाल
आज अरविंद केजरीवाल द्वारा मतदान किये बिना गोवा जाने का फैसला आपकी नजर में क्या था। यह महज एक गोवा जाने की जल्दीबाजी थी या फिर लोकतंत्र का अपमान। अगर केजरीवाल को कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं था तो वह फार्म 49 भरकर अपना विरोध जता सकते थे। इस सवाल का जबाब हमें आपसे चाहिए। आप अपने जबाब हम तक पहुंचाने के लिये नीचे दिये गये कमेंट बॉक्स में दर्ज करायें। आपके बहुमुल्य जबाब का हमें इंतजार रहेगा।













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