पित्रोदा की सिफारिश से रेल मंत्रालय की बोलती बंद

खजाना खाली होने का रोना रो रहे रेल मंत्रालय को सैम पित्रोदा समिति ने रेलवे के कायाकल्प के लिए 5 लाख 60 हजार करोड़ रुपये की भारी भरकम सिफारिशें थमाकर और मुश्किल में डाल दिया है। रेल तंत्र के आधुनिकीकरण और सुरक्षा के लिए अगले पांच साल में यह रकम खर्च करने की समिति की रिपोर्ट के बाद मंत्रालय के सामने अब अहम चुनौती यह है कि इतनी बड़ी राशि का जुगाड़ आखिर हो तो कैसे। रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने भी माना कि इतनी रकम का जुगाड़ करना आसान नहीं है। वैसे उन्होंने कहा कि सिफारिशों को लागू करना रेल मंत्रालय ही नहीं, यूपीए सरकार की भी जिम्मेदारी है।
त्रिवेदी ने केंद्र सरकार का नाम लिए बिना कहा कि अगर आपके पास पैसा नहीं है तो फिर रेलवे का विकास मुश्किल है। अगले पांच सालों में बुनियादी ढांचे पर होने वाले खर्च का 10 फीसदी ही यदि रेलवे को मिल जाए तो उसकी जरूरतें पूरी हो सकतीं हैं। सिफारिशें लागू करने का लिए केंद्र को हर साल रेलवे को 40,000 करोड़ रुपये मुहैया कराने होंगे। इसके अलावा रेलवे को दूसरे स्रोतों से भी आमदनी बढ़ानी होगी। इससे पहले, पित्रोदा समिति ने अपनी पांच सूत्रीय रिपोर्ट में रेल मंत्रालय को मूल उपकरणों का आधुनिकीकरण के अलावा आमदनी के नए विकल्पों की खोज करने पर भी जोर देने को कहा था। सात सदस्यीय समिति ने सरकार को चालू योजनाओं का पुन: निरीक्षण, अधिकारियों को फैसले लेने की आजादी, और साधनों का समुचित उपयोग करने पर भी तमाम सुझाव दिए हैं।
रेल बजट पेश होने में अभी 15 दिन से ज्यादा का समय है लेकिन मंत्रालय ने समिति के प्रमुख सेम पित्रोदा के दिल्ली आने का इंतजार किए बिना ही समिति से रिपोर्ट पेश करने को कह दिया। वैसे, पित्रोदा ने वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए दिल्ली में बैठे रेलवे के अधिकारियों को रिपोर्ट में शामिल सिफारिशों की जानकारी दी। उनके अलावा समिति के सदस्य और एचडीएफसी बैंक के अध्यक्ष दीपक पारिख भी मौजूद नहीं थे।












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