हड़ताल की आड़ में जेब भरने की होड़

शुरुआत हम बेंगलुरु से करते हैं, जहां ऑटो चालाकों की सुबह पौबारा है। रोजाना जिस रूट पर 20 रुपए लगते हैं, आज वहीं लोगों से वो 50 रुपए ऐंठ रहे हैं। यही हाल कुछ मुंबई, दिल्ली व कोलकाता में भी है। इसी तरह प्राइवेट बस वालों ने भी आज अचानक दाम बढ़ा दिये। ये वो लोग हैं जो सप्ताह भर की कमाई एक दिन में करने की फिराक में रहते हैं। वहीं दूसरी ओर वो लोग हैं जो आज पिकनिक मना रहे हैं।
खास बात यह है कि पिकनिक मनाने वाले लोग उन्हीं में शामिल हैं, जो अपना कामकाज छोड़कर 'श्रमिक कानून' लाने के लिए देशव्यापी हड़ताल पर हैं। देश और राज्यों के कर्मचारी संगठनों के हड़ताल पर जाते ही तमाम कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण आप लखनऊ विश्वविद्यालय, शक्तिभवन और जवाहर भवन में आसानी से देख सकते हैं। खास बात यह है कि यहां पर तमाम कर्मचारी तो ऐसे हैं जो ऐसी हड़तालों का इंतजार करते हैं। कथित तौर पर हड़ताल पर बैठे तमाम कर्मचारी वो हैं जो हस्ताक्षर करने के बाद परिवार संग घूमने निकल गये हैं।
इस हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा दिक्कत उन लोगों को हो रही है, जिनका सीधा सरोकार पब्लिक काउंटर से है। किसी के फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि है, तो किसी को आज अर्जेन्ट ड्राफ्ट बनवाना है, किसी को डिग्री निकलवानी है तो किसी को पासपोर्ट संबंधित काम है। किसी को वाहनों की एनओसी चाहिये तो किसी को सर्टिफिकेट चाहिये। ऐसे तमाम काम हैं, जिनकी वजह से लोगों को आये दिन कर्मचारियों से दो-चार होना पड़ता है। खास बात यह है कि हड़ताल के वक्त तमाम कर्मचारी ऐसे भी हैं, जो बैकडोर से काम करवाकर कमाई करने में जुटे हुए हैं। चूंकि आज हड़ताल के बावजूद आज का दिन वर्किंग डे में गिना जायेगा लिहाजा काम कराने में कोई दिक्कत भी नहीं हो रही है।












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