दया याचिकाओं में देरी पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court
दिल्ली (ब्यूरो)। सुप्रीम कोर्ट भी सरकार की हरकतों से कम हलकान है। यहीं कारण है कि वह सरकार की नाकामी पर बार बार प्रश्न उठा रहा है। इसी कड़ी में सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिकाओं के निपटान में देरी पर केंद्र सरकार व राज्य सरकारों को कटघरे में खड़ा किया है। कोर्ट ने राज्यों को आदेश दिया है कि वे तीन दिन के भीतर लंबित दया याचिकाओं का ब्योरा दें।

जस्टिस जीएस सिंघवी की पीठ ने ये निर्देश आतंकी देवेंदर पाल सिंह भुल्लर की फांसी माफी की याचिका पर सुनवाई। पीठ ने राज्यों के गृह सचिवों को निर्देश दिया कि वे तीन दिन के भीतर अपने यहां की दया याचिकाओं के रिकार्ड केंद्र सरकार को भेजें। कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने तय समय में रिकार्ड नहीं भेजे तो वे परिणाम के लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे। पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि दया याचिकाओं के निपटारे में इतनी देर क्यों होती है।

दया याचिका के सक्षम अधिकारी के पास पहुंचने के बाद क्या किया जाता है। एक मामले में दया याचिका निपटाने में 11 वर्ष लगे और एक अन्य मामले में 8 साल लगे। ये बहुत लंबा समय है। केंद्र की दलील थी कि दोषियों की ओर से बार-बार याचिका दाखिल करने के कारण देरी होती है, लेकिन पीठ इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुई। पीठ ने कहा कि दोबारा याचिका दाखिल करने पर कोई रोक नहीं है। पीठ ने सुनवाई की अगली तिथि 1 मार्च को तय करते हुए साफ किया कि इसके बाद सुनवाई से कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा।

राज्यों को 3 दिन के भीतर विशेष संदेशवाहकों के जरिए दया याचिकाओं का ब्योरा पहुंचाना होगा और टेलीफोन के जरिए एएसजी को इसकी सूचना देनी होगी। मालूम हो कि भुल्लर को पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष एमएस बिट्टा की कार में बम विस्फोट के मामले में फांसी की सजा हुई है। उस हमले में बिट्टा तो बाल-बाल बच गए थे, लेकिन उनका एक पैर उड़ गया था। हमले में 9 अन्य लोगों की मौत हो गई थी।

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