आईआईटी के साथ होगी अन्य इंजीनियरिंग कॉजेजों की प्रवेश परीक्षा

मध्य प्रदेश की शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस ने इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम करार दिया। वहीं पश्चिम बंगाल के रवि रंजन चट्टोपाध्याय ने कहा कि अभी तो उन्हें नए प्रस्ताव का मूल ड्राफ्ट ही नहीं मिला है। उसे देखने व अपने यहां विचार-विमर्श के बाद ही वे राय देंगे। उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री मातबर सिंह कंडारी ने कहा कि ऐसी किसी व्यवस्था में राज्यों के कोटे का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहीं प्रदेश की प्रमुख सचिव (वित्त) वृंदा सरूप ने कहा कि दाखिले की नई व्यवस्था में राज्यों के शिक्षा बोर्ड को महत्व अच्छी बात है, लेकिन आइआइटी में दाखिले का सिस्टम यूनीक है, इसलिए उसमें बहुत सोच-समझकर बदलाव किया जाना चाहिए।
तमिलनाडु समेत कई दूसरे राज्यों ने भी लगभग इसी तरह की राय रखी है। अलबत्ता, केंद्रीय इंजीनियरिंग संस्थानों में इस व्यवस्था के अमल पर किसी को एतराज नहीं है। लेकिन वे अपने यहां के छात्रों के उसका हिस्सा बनने में अपने शिक्षा बोर्ड को पूरी तवज्जो दिए जाने की जबरदस्त पैरवी की है। राज्य का यह रुख इसलिए ज्यादा मायने रखता है, क्योंकि केंद्र के अधीन बमुश्किल 70 प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग व साइंस कॉलेज हैं, जबकि राज्यों व निजी क्षेत्र में उनकी संख्या लगभग दस हजार बताई जाती है।
केंद्रीय इंजीनियरिंग संस्थानों में एक ही प्रवेश परीक्षा से दाखिले की यह व्यवस्था 2013-14 से लागू होगी। सीबीएसई अपने नतीजों को राज्यों के शिक्षा बोर्डो के नतीजों के साथ जोड़कर एक सामान्य स्तर तय कर देगा। स्कूली शिक्षा बोर्ड के अंकों को न्यूनतम 40 प्रतिशत महत्व दिया जाएगा। जबकि, बाकी एकल प्रवेश परीक्षा के अंकों पर तय होगा। एकल प्रवेश परीक्षा अगले साल अप्रैल व नवंबर में होगी।












Click it and Unblock the Notifications