फिलहाल नहीं मिलेगी न्यूनतम एक हजार पेंशन

सूत्रों के मुताबिक 4.72 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचाने वाले इस प्रस्ताव पर यूनियन लीडर और नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों द्वारा अतिरिक्त बोझ लेने के लिए तैयार नहीं होने के कारण सहमति नहीं बन सकी। बोर्ड की बैठक बाद संवाददाताओं से बात करते हुए केंद्रीय श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस प्रस्ताव को लागू करने की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। यह समिति अपनी रिपोर्ट एक माह के अंदर सौंप देगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। सीबीटी की बैठक में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के वार्षिक आर्थिक चिट्ठे पर बोर्ड ने अपनी मुहर लगा दी है। लेकिन भविष्य निधि अंशदाताओं के लिए बैंक पासबुक की तरह कांट्रीब्यूशन कार्ड जारी करने के प्रस्ताव पर बोर्ड ने आम सहमति नहीं बन पाई। माना जा रहा है कि बोर्ड की आगामी बैठक में इस पर फिर से चर्चा हो सकती है।
गौरतलब है कि ईपीएफओ के अंशधारकों में से करीब 14 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हें पांच सौ रुपये से भी कम पेंशन मिलती है। जबकि लगभग सात लाख लोगों को एक हजार रुपये बतौर पेंशन राशि मिल पाते हैं। ईपीएफओ की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च, 2010 तक इस संस्था के पास 35 लाख पेंशनभोगी थे। इनमें से 14 लाख लोगों को 500 रुपये से भी कम की मासिक पेंशन मिलती है।
हर महीने एक हजार रुपये पेंशन पाने वाले लोगों की तादाद तकरीबन सात लाख है। ईपीएफओ के आंकड़ों के मुताबिक कुछ लोगों को 12 और 38 रुपये तक की मासिक पेंशन भी मिलती है। उन्होंने कहा कि पेंशन राशि को एक हजार रुपये बढ़ाने के लिए अंशदाताओं के पेंशन खाते में मूल वेतन और डीए के 0.63 फीसदी के बराबर अतिरिक्त योगदान की जरूरत होगी। अभी कर्मचारियों को पेंशन खाते में 8.33 फीसदी का योगदान करना पड़ता है और इसमें सरकार की ओर से 1.16 फीसदी का योगदान किया जाता है।












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