यूपी के प्राचीन मंदिरों में गूंजे शिव के जयघोष

शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लग गया। राजधानी लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर में भोर होते ही भक्तों की लंबी कतार लग गयी। राजधानी के हर छोटे बडे शिव मंदिरों में यही नजारा रहा। हजरतगंज, तालकटोरा, आलमबाग, फैजाबाद रोड सहित तमाम मु य मार्गो पर इन दिनों कांवरियों के लिए तमाम कै प लगाये गये हैं। तो राजधानी के शिवमंदिरों में भी महाशविरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया गया। कई जगहों पर शिव बारात भी निकाली गयी। वहीं बाराबंकी के लोधेश्वर और महादेव मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा।
बाराबंकी जिला मुख्यालय से लगभग 35 किमी दूर तहसील रामनगर में स्थित इस मंदिर में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जिसकी एक पौराणिक कथा है। किवदंती के अनुसार महाभारत काल के पूर्व भोले शंकर की पृथ्वी पर प्रकट होने की इच्छा हुई। ब्राह्मण लोधेराम को भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन दिए। लोधेराम सुबह खेत में सिंचाई कर रहे थे तभी एक स्थान पर गढ्ढे में पानी भरने लगा। बहुत प्रयास के बाद भी जब पानी नहीं रुका तो लोधेराम घर आकर थककर सो गए।
रात में भगवान शंकर ने उन्हें फिर दर्शन दिए और कहा कि पानी भरने वाला स्थान मेरा है इसलिए मुझे वहां स्थापित करो। लोधेराम ने सुबह जब पानी भरने वाले स्थान को खोदा फांवडा जमीन में गड़े शिवलिंग से टकराया। स्वप्न में दिखाई देने वाला शिवलिंग अब ब्राह्मण केसामने था। शिवलिंग को बाहर निकालने का प्रयास किया गया लेकिन वह बाहर नहीं निकला, इस कारण उसकी स्थापना वहीं कर दी गई। तभी से इस मंदिर का नाम लोधेश्वर महादेव पड़ा। इस मंदिर का वर्णन महाभारत काल में भी मिलता है। पाण्डवों ने शिवलिंग की पूजा करके यहां यज्ञ भी किया था।
वहीं सीतापुर जिले के पौराणिक तीर्थ स्थल नैमिषारण्य में महाशिवरात्रि के पर्व पर बाबा भूतनाथ के मंदिर में विशेष श्रंगार एवं पूजा अर्चना की गयी। यह मंदिर चक्रतीर्थ पर पूरब की आेर स्थित है। पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार बाबा भूतनाथ मंदिर का यह शिवलिंग अति प्राचीन है।












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