निजी स्कूल संचालको का राइट टू एजुकेशन के खिलाफ प्रदर्शन

जिससे राज्य में अव्यवस्था व असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले ही आरटीई के तहत 25 प्रतिशत आरक्षण गरीब बच्चों को दिया हुआ है और अब प्रदेश सरकार शिक्षा नियमावली 134 ए थौंप कर स्कूल संचालकों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूल संचालकों को किसी प्रकार की कोई ग्रांट भी उपलब्ध नहीं करवाई जाती है और न ही किसी प्रकार की रियायत दी जाती है। उन्होंने मांग की कि धारा 134 ए को वापस लिया जाए। स्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों को फार्म एक को भरवा कर दोबारा मान्यता लिए जाने के लिए मजबूर न किया जाए। 2007 से पूर्व के अस्थायी तथा अनुमति प्राप्त स्कूलों को तुरंत स्थायी मान्यता दी जाए। मान्यता के लिए आवेदन करने वाले 3100 स्कूलों को अधिकतम राहत प्रदान की जाए।
मान्यता प्राप्त स्कूलों को पुराने नोरम के अनुसार अप्रगेडेशन दी जाती है। 96 स्कूल संचालकों के खिलाफ वर्ष 2007 में बनाए गए मुकद्दमें वापस लिए जाएं। फार्म नंबर एक, चार, छह और सात का सरलीकरण किया जाए। बाद में सभी निजी स्कूल संचालक सरकार तथा शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और मांगों से संबंधित ज्ञापन नगराधीश को सौंपा।












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