प्रज्ञा ठाकुर की कहानी- साध्वी की होती थी पिटाई

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स्वामी पूर्ण चेतनानंद गिरि उर्फ साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर इस संबंध में राष्ट्रपति से गुहार की है। साध्वी प्रज्ञा ने कहा है कि उनकी पिटाई करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मालेगांव बम धमाकों के सिलसिले में साध्वी प्रज्ञा मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं।
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से उनके खिलाफ कथित षडयंत्र रचने और बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं देने वाले एटीएस अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने राष्ट्रपति से इस संदर्भ में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी कार्रवाई करने का आदेश देने का अनुरोध किया है।
साध्वी ने हाल में भेजे अपने 15 पृष्ठीय पत्र में कहा है कि मालेगांव में 29 सितंबर, 2008 को हुए बम धमाकों के मामले में वह भायखला जेल में बन्द हैं और यह पत्र अत्यन्त विह्वल मन से एटीएस अधिकारियों द्वारा किए गए कथित दुर्व्यवहार, उत्पीड़न और उन्हें इस मामले में जबरन फंसाने के संबंध में लिख रही है ताकि उन्हें विलंब से ही सही पर न्याय तो मिल सके।
पत्र में उन्होंने लिखा है कि उन्होंने न कभी हिंसा का समर्थन किया और न ही हिंसा का रास्ता अपनाया पर उन्हें मालेगांव बम विस्फोट मामले में इस्तेमाल मोटरसाइकिल को लेकर फंसा दिया गया है। बाइक उन्होंने वर्ष 2004 में ही मध्य प्रदेश के सुनील जोशी को 24 हजार रुपये में बेच दी थी।
इसके हस्तांतरण संबंधी कागजों पर आरटीओ कार्यालय में हस्ताक्षर भी कर दिए थे। पत्र में उन्होंने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 7 अक्तूबर, 2008 को उनके जबलपुर आश्रम में इंसपेक्टर सावंत का फोन आया और उसने उन्हें पूछताछ के लिये सूरत बुलाया गया। पूछताछ में मालेगांव बम विस्फोट मामले से कोई संबंध होने से बार बार मना करने के बावजूद उन्हें उनके शिष्य भीम भाई पसरीचा के साथ मुंबई ले जाया गया जहां उन्हें मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी गई। पत्र में एटीएस टीम के सदस्य परमवीर सिंह, इंस्पेक्टर खानविलकर,
श्रीमती सुवर्णा शिंदे और मुंबई आतंकी घटना में शहीद हेमंत करकरे आदि के नामों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि इन सभी ने साध्वी को दिन में और रात में अनेक बार बुरी तरह पीटा और उनके चरित्र पर लांछन लगाया।












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