अनाज की बर्बादी रोकने के लिए जल्द आयेगा 'फूड कोड'

आने वाले दिनों में यदि सामाजिक समारोह के निमंत्रण पत्र पर भोजन से संबंधी हिदायतें लिखी हों तो हैरान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए जल्द ही आयोजकों को निमंत्रण पत्र में भोजन है अमूल्य इसे बर्बाद न करें, जितना खाएं उतना ही परोसे, पेट है गोदाम नहीं इससे न करें खिलवाड़, जैसी लाइनें बड़े-बड़े शब्दों में लिखना अनिवार्य हो जाएगा।
सरकार एक आदर्श आचार संहिता तैयार कर रही है। जिसे इस साल के दूसरी तिमाही से देश भर में लागू कर दिया जाएगा। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के मुताबिक शादी, पार्टी, सामाजिक या गैर सामाजिक समारोहों के दौरान बड़ी मात्रा में होने वाली भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए कानून बनाना भले ही मुमकिन न हो, मगर एक आदर्श आचार संहिता बनाई जा सकती है।
सरकार ने आचार संहिता का मसौदा बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके पूर्व सरकार ने भोजन की बर्बादी के घटक व उसकी मात्रा का आकलन व उसे रोकने के उपायों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) को सौंपी थी। जिसने दिल्ली-एनसीआर के होटल, रेस्टोरेंट, सामाजिक व सरकारी संस्थानों के साथ ही प्रमुख सोसाइटियों से व्यापक विचार-विमर्श करके अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के सचिव राजीव अग्रवाल ने बताया कि आईआईपीए जल्द ही अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगा। जिसमें भोजन की बर्बादी को रोकने के उपाय और सुझाव के साथ ही उठाए जा सकने वाले अन्य जरूरी कदमों का व्यापक उल्लेख होगा। फिलहाल मंत्रालय ने आदर्श आचार संहिता तैयार करने पर काम शुरू कर दिया है। मंत्रालय आम आदमी को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाने पर भी विचार कर रहा है।
मौजूदा समय जिस तरह से पानी की बर्बादी रोकने के लिए विभिन्न मंत्रालय जागरूकता अभियान चला रहे हैं। उसी तर्ज पर भोजन की बर्बादी को रोकने का अभियान शुरू किया जा सकता है।












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