बिना फीते के जूते पहनने की बिसेन ने खाई कसम

मीडिया और राजनीतिक तौर पर कड़ी आलोचनाओं का सामना कर रहे बिसेन ने इस घटना पर सफाई दी है कि उक्त बालक उनके पारिवार का सदस्य है और उसे व्यक्तिगत देखरेख के लिए उनके साथ रखा गया है। उन्होने कहा कि बायपास सर्जरी एवं हार्निया की शिकायत के बाद चिकित्सकों ने उन्हें झुकने से मना किया है। मंच पर अपने फीते खुले देखकर वह उन्हें बांधने का प्रयास कर ही रहे थे, जिसे देखकर छोटू उनके पास आया और फीते बांधने में मदद की। प्रदेश के सहकारिता मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह किशोर आदिवासी नहीं है, छात्र भी नहीं है और भाजपा से उसका कोई लेना देना नहीं है।
शुभम उर्फ छोटू नामक यह बालक उनके मामा का लड़का है, जो पिछड़े वर्ग से है। बिसेन ने कहा कि वह अपनी गलती मानते हैं कि सार्वजनिक जीवन में प्रत्येक जनप्रतिनिधि को सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्होने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूरिया एवं केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि वस्तुस्थिति की जानकारी लिए बिना इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्हें ऐसे जिम्मेदार राजनेताओं से ऐसी उम्मीद नहीं थी, क्योंकि संबंधित बालक आदिवासी अथवा छात्र नहीं है, उनके परिवार का सदस्य है एवं किसी राजनीतिक दल का सदस्य भी नहीं है। उसकी उम्र 18 वर्ष है।












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