ऑप्रेशन के बाद घटेगा 60 किलो वजन

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दिल्ली ( ब्यूरो)। इस अफगान बच्ची की उम्र मात्र तेरह साल है पर वजन है 135 किलोग्राम। काबुल से आई किशोरी बेबी पार्सिला की बैरियाट्रिक सर्जरी प्राइमस सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में की गई है। वैसे तो बैरियाट्रिक सर्जरी की इजाजत 18 साल से कम उम्र में नहीं दी जाती है लेकिन उसका वजन जिस कदर बढ़ रहा था उसे देखते हुए डाक्टरों को नियम तोड़ना पड़ गया।

यहां बता दे इसी सर्जरी के बल पर अदनान सामी आज छरहरे दिख रहे हैं। डाक्टरों को भरोसा है कि छह महीने में उसका वजन 60 किलो ग्राम कम हो जाएगा। इस आपरेशन कुछ 2.60 लाख खर्च आया है। सर्जरी करने वाले डॉ.अतुल एन.सी.पीटर्स का कहना है कि कुछ दिनों बाद पार्सिला के मुड़े हुए घुटने को ठीक करने के लिए भी सर्जरी की जाएगी।

अत्यधिक मोटापे को कम करने वाली सर्जरी की सुविधा अफगानिस्तान में न होने के कारण बेबी पार्सिला को दिल्ली लाना पड़ा। पार्सिला का वजन पिछले तीन सालों से अप्रत्याशित रूप से बढ़ रहा था। मात्र 153 सेंटीमीटर लंबी पार्सिला का बॉडी मॉस इंडेक्स यानी बीएमआई 50.8 था। डॉ.अतुल ने बताया कि जांच से यह बात सामने आई कि इंडोक्रिनल विकार से पार्सिला ग्रसित नहीं है।

लेकिन जानू वैलगम गंभीर रूप से ग्रसित हो रही है। जानू वैलगम उस स्थिति को कही जाती है जिसमें घुटने तो सटते हैं लेकिन टखने नहीं एक दूसरे को छूते हैं। अत्यधिक मोटापे के कारण अप्रत्याशित तनाव बढ़ता है जिसके कारण बढ़ने वाली हड्डियों और जोड़ों में विकार पैदा हो जाता है। ऐसी स्थिति में न तो ठीक से खड़ा रहा जा सकता है और न ही टहला जा सकता है।

क्योंकि घुटने एक दूसरे को छूते रहते हैं जबकि टखने दूर भागते रहते हैं। इसके कारण चलने के तरीके में परिवर्तन आ जाता है। उनका कहना है कि बैरियाट्रिक सर्जरी की सलाह 18 साल से कम उम्र के लोगों को नहीं दी जाती है लेकिन बेबी पार्सिला की हालत ऐसी थी जिसके कारण यह सर्जरी करनी पड़ी। क्योंकि खानपान पर नियंत्रण रखकर पार्सिला का वजन कम नहीं किया जा सकता था।

मोटापे को कम करने के लिए पार्सिला के स्टोमेक का 75 फीसदी हिस्सा स्लीव गैस्ट्रोक्टनॉमी के जरिए काटकर बाहर निकाल दिया गया है। जिसके कारण शरीर के अंदर जमा फैट धीरे धीरे समाप्त होगा और अगले छह माह के अंदर लगभग 60 किलोग्राम वजन कम हो जाएगा। मोटापे कम करने में बैरियाट्रिक तकनीक को अत्याधुनिक माना जाता है।

तकनीक की खासियत यह है कि शरीर पर तीन छोटे छोटे छेद किए जाते हैं। एक छेद से काटने के औजार अंदर भेजा जाता है जबकि दूसरे से सहायक तंत्र। तीसरे छेद से कैमरा भेजकर कंप्यूटर पर स्थिति की जानकारी ली जाती है। सर्जरी के दौरान पेट के ज्यादातर हिस्से को बांध दिया जाता है या काटकर बाहर निकाल दिया जाता है। क्योंकि पेट जितना लंबा होता है आदमी उतना ही ज्यादा भोजन करता है। जब पेट छोटा होगा तो आदमी भोजन भी कम करेगा।

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