अंतरजातीय विवाह से जन्मा बच्चा भी आरक्षण का हकदार: सुप्रीम कोर्ट

दोनों ही न्यायमूर्तियों ने जस्टिस रमेशभाई दभाई नाइका की गुजरात सरकार के फैसले को अपील करने वाली याचिका पर यह बातें कहीं। गुजरात सरकार ने याचिकाकर्ता को अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण देने से इनकार कर दिया था क्योंकि उसके पिता उच्च क्षत्रिय समुदाय के थे।
जस्टिस आफताब आलम और रंजना प्रकाश देसाई ने कहा कि अंतरजातीय विवाह जैसे आदिवासी और गैर आदिवासी के बीच विवाह से जन्में बच्चे का जाति निर्धारण प्रत्येक मामले में अंतर्निहित तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा मामला सामने आये तो बच्चा अपनी मां के प्रमाण पत्र दिखा कर आरक्षण का फायदा पा सकता है केवल यह कहकर कि उसकी मां भले ही आरक्षण वर्ग की है लेकिन पिता उच्च वर्ग के है तो उसे आरक्षण नहीं मिलेगा यह कहना अर्थहीन और बेकार है।












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