बाईबैक की खबरों के बाद रिलायंस में तेजी

बताया जाता है कि 20 जनवरी को कंपनी अपनी तीसरी तिमाही के परिणाम घोषित करेगी। मुकेश अंबानी की इस कंपनी के शेयर दो-तीन सालों से अच्छा परफॉर्म नहीं कर पा रहे हैं और उसके निवेशक निराश हैं। इसीलिए अंबानी कंपनी के शेयर खुद खरीदने का विचार कर रहे हैं। सितंबर महीने में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास 61,490 करोड़ रुपये की नकद पूंजी थी। इसलिए यह देश की सबसे मूल्यवान कंपनी मानी जाती है। बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि रिलायंस के शेयर काफी आकर्षक स्तर पर हैं और इन्हें खरीदना समझदारी ही होगी। रिलायंस ऐसा मौका नहीं हाथ से जाने नहीं देगी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2005 में भी ऐसा ही किया था। शुक्रवार को बायबैक पर चर्चा के लिए कंपनी की एक बैठक भी है। कंपनी ओपन ऑफर मार्केट के जरिए बायबैक कर सकती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास मौजूदा समय में 80,000 करोड़ रुपये की नकदी है जिसमें कंपनी 12-15 हजार करोड़ रुपये का इस्तेमाल बायबैक के लिए कर सकती है। वहीं बायबैक की खबर के चलते कंपनी के शेयर में तेजी देखी जा रही है ।
रिलायंस इंडस्ट्रीज प्राइस वैल्यु को सुरक्षित करने के लिए बायबैक करेगी। क्योंकि पिछले 3-4 तिमाहियों से कंपनी के नतीजे काफी खराब रहे हैं। वहीं चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भी रिलायंस इंडस्ट्रीज के नतीजे कमजोर रहने का अनुमान है। जिसके चलते प्राइस वैल्यू में गिरावट देखी जा रही है, इसी के चलते कंपनी ने बायबैक का फैसला किया है।
इस बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा है कि अगर सरकार केजी डी6 ब्लॉक का कुछ हिस्सा छोड़ने के लिए दबाव बनाती है, तो कंपनी उस क्षेत्र में किए गए इनवेस्टमेंट को लौटाने की मांग कर सकती है। रिलायंस का कहना है कि कंपनी ने 7,645 वर्ग किलोमीटर में फैले इस समूचे क्षेत्र को अपने पास रखने की जरूरी मंजूरी लेने के बाद ही क्षेत्र में निवेश किया। रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कंपनी का मानना है कि उत्पादन हिस्सेदारी अनुबंध (पीएससी) से ठेकेदार को ब्लॉक का वह हिस्सा अपने पास रखने का अधिकार मिलता है, जहां उसे पेट्रोलियम की संभावना लगती हो।












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