गिलानी पर कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी

मेमोगेट और हाईप्रोफाइल भ्रष्टाचार मामलों में भ्रष्ट लोगों को बचाने वाले कानून एनआरओ को लेकर प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी सुप्रीम कोर्ट के निशाने पर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सरकार से जवाब मांगा था। इन मामलों पर सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है।
सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए पाकिस्तानी अटार्नी जनरल ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा कोई हिदायत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट से वक्त मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा कदम उठाते हुए सरकार को 20 मिनट का वक्त दिया था। इस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी पर कोर्ट की अवमानना का मामला चल रहा है।
सबसे पहला मामला एनआरओ यानि नेशनल रिकॉन्सियेंस कानून का है। जिसे पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ लेकर आए थे। जिसके तहत बेनजीर भुट्टो व आसिफ अली जरदारी सहित लगभग 8 हजार लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में छूट मिल गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में इस कानून को रद कर दिया था। जिसके बाद कोर्ट ने प्रधानमंत्री गिलानी से भ्रष्टाचार के मामलों में राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ जांच करने के आदेश दिए थे।
सरकार ने इन मामलों में आसिफ अली जरदारी के खिलाफ जांच नहीं की थी। जिसके बाद सरकार ने सरकार से इस मामले में जवाब मांगा था। जिसके बाद गिलानी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना करने का खतरा पैदा हो गया था।
दूसरा मामला मेमोगेट को लेकर था। जिसमें राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अमेरिका से तख्तापलट के डर होने की बात कही थी। इसमें राष्ट्रपति ने अमेरिका से तख्तापलट से बचाने क लिए अपील की थी। यह मेमोगेट बाद में लीक हो गया था।
सरकार इस मामले की जांच कर रही है। वहीं इस मामले को भी सुप्रीम कोर्ट में लाया गया था। जिस पर कोर्ट ने सरकार को नोटिस दिया था। सरकार ने इस मामले में सेना और आईएसआई द्वारा कोर्ट में दिए गए बयान को असंवैधानिक करार दिया था।
प्रधानमंत्री गिलानी ने रक्षा सचिव को भी बर्खास्त कर दिया था। जिसके बाद वहां सेना और सरकार आमने-सामने आ गई थी। इस दौरान गिलानी ने सेना और आईएसआई पर कई संगीन आरोप भी लगाए थे।












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