कांग्रेस को कहीं ले न डूबे खफा कांग्रेसियों की रणनीति
कांग्रेस टिकट प्राप्ति के दावेदारों की लंबी कतार से क्यास लगाया जा रहा था कि बगावती डुगडुगी बजेगी, जिस पर अंकुश लगाने के लिए कांग्रेस आलाकमान को कड़ी मशक्कत करनी होगी। कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरेंद्र सिंह के भाई राजा मालविंद्र सिंह की कांग्रेस को ''टा-टा" तथा पटियाला जनपद में बहावलपुरी समाज की अनदेखी कांग्रेस पर भारी पड़ सकती है, क्योंकि जनपद पटियाला के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में इस समाज का अच्छा प्रभाव है तथा सभी क्षेत्रों में यह समाज निर्णायक भूमिका निभाता आ रहा है। पटियाला जिले के साथ-साथ जिला संगरूर, जिला मानसा, जिला फाजिल्का, जिला फिरोजपुर में भी कांग्रेस को इस समाज की अनदेखी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
कांग्रेस भले ही इस चुनाव में सत्ता के सपने देख रही हो, मगर भीतरघात से नहीं बच सकती। पंजाब में डेढ़ दर्जन के करीब क्षेत्रों में कांग्रेस के बागी उम्मीदवार चुनावी दंगल में उतरेंगे, जबकि इतने ही विधानसभाई क्षेत्रों में नाराज कांग्रेस प्रत्याशियों की विजयीश्री में रोड़ा अटकायेंगे। कांग्रेस को मौजूदा चुनावों में भाजपा टिकट पर चुनावी दंगल में उतरे प्रत्याशी लाभांवित करेंगे, जबकि सांझा मोर्चा भी कांग्रेस को लाभ पहुंचायेगा, ऐसा राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है, क्योंकि प्रदेश में रूठे कांग्रेसी दिग्गजों को मनाना कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरेंद्र सिंह के वश की बात नहीं।
जो कांग्रेस प्रधान अपने रूठे भाई को नहीं मना सकता, उससे क्या उम्मीद की जा सकती है? राज्य की जनता भले ही प्रदेश में सत्ता बादल की पक्षधर हो, मगर कांग्रेस के अपने ही इस बदलाव में बदलाव लाने के लिए नई योजना को अमलीजामा पहनाने को तैयार है। सत्तारूढ़ अकाली दल-भाजपा को, जहां मनप्रीत बादल के सांझे मोर्चा से भय है, वहीं कांग्रेस में मनप्रीत बादल जैसे दिग्गजों की कमीं नहीं है, जो कांग्रेस की चिंता बढ़ाये हुए है। कांग्रेस आलाकमान भी जानता है कि नाराज कांग्रेसी दिग्गज नुकसान पहुंचा सकते है, मगर वरिष्ठ कांग्रेसी दिग्गजों की अनदेखी भी तो नहीं की जा सकती। पूरे प्रदेश में कांग्रेसी दिग्गजों की बगावत व नाराजगी के चलते अकाली-भाजपा जरूर हौंसले में है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस भीतरघात से वह जरूर लाभांवित होंगे।













Click it and Unblock the Notifications