अश्लील शो के 'बीप' से कम नहीं हाथी पर पर्दा
बिग बॉस ने जब टेलीविजन पर दस्तक दी, तो उसका समय रात्रि 8 बजे रखा गया, लेकिन कार्यक्रम में अश्लीलता को देखते हुए उसका समय रात्रि 10:30 बजे कर दिया गया। और तो और जब-जब शो में गाली-गलौज आती तब-तब 'बीप' का साउंड सुनाई देता। इसी बीप ने बिग बॉस को इतना पॉपुलर बना दिया, कि वो टीआरपी की बुलंदियां छूने लगा। तमाम लोग सिर्फ बीप सुनने के लिए उस शो को देखते थे, भले ही गाली सुनाई दे चाहे नहीं....
ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश की जनता के साथ होने वाला है। 11 जनवरी तक प्रदेश भर में मायावती और उनके हाथी की मूर्तियां सफेद कपड़े से ढक जायेंगी। यानी 12 जनवरी की सुबह से इन उद्यानों और स्मारकों पर यही पर्दे किसी 'बीप' से कम नहीं होंगे। दूर दराज गांव में रहने वाला आदमी जो मायावती के चुनाव चिन्ह के बारे में नहीं जानता होगा, उसके मन में कौतूहल पैदा होगा। अब तक उस सड़क से सीधे निकल जाने वाले लोग मुड़-मुड़ कर देखेंगे और पूछेंगे अरे भाई इस पर्दे के पीछे क्या है? जवाब होगा माया का हाथी.... इससे साफ जाहिर है कि जिस हाथी को ढक कर चुनाव आयोग मायावती के प्रचार को रोकना चाहता था, वही हाथी माया के लिए दोगुना प्रचार करेगा।
खैर चुनाव आयोग ने तो सभी नियमों का पालन करते हुए हाथी को कपड़ा पहना दिया, लेकिन नेताओं ने उस सफेद कपड़े को नया नाम दे दिया है। अभी तक यह बात राजनीतिक गलियारों में थी, अब खुले मैदान में हजारों लोगों की जनसभा में भी आ गई। वो यह कि चुनाव आयोग ने खुद मायावती को कफन पहना दिया है। यह बात समाजवादी पार्टी के युवराज अखिलेश यादव ने सोमवार को कही।
अखिलेश ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "चुनाव आयोग ने हाथी को सफेद कपड़ा उढ़ाने का निर्देश दिया है। आपको पता है सफेद कपड़े से क्या तात्पर्य है? वो सफेद कपड़ा नहीं कफन है, जो खुद चुनाव आयोग पहनायेगा। यानी चुनाव आयोग मान चुका है कि मायावती की सत्ता उत्तर प्रदेश में वापस नहीं आने वाली।"
सपा के युवराज को शायद यह नहीं पता है कि जिस कपड़े को वह कफन कह रहे हैं, वही कफन मायावती की बसपा को एक बार फिर जीवनदान देगा। क्योंकि हर आदमी यह जानने की कोशिश जरूर करेगा कि आखिर पर्दे के पीछे क्या है।













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