यूपी के डीजीपी बृजलाल व प्रमुख सचिव गृह कुंवर फतेह बहादुर सिंह हटाए गए
मुख्य निर्वाचन अधिकारी एसवाई कुरैशी ने कहा कि प्रदेश के सभी विपक्षी दलों की मांग की थी कि इन अधिकारियों को पद से हटाया जाए क्योंकि इनके पद पर रहने से यह लोग चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। आयोग ने राजनैतिक दलों की मांग को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय सुनाया। आयोग के इस निर्णय से जहां दलों में खुशी फैल गयी वहीं बसपा ने इसे गलत निर्णय करार देते हुए कहा कि इससे पूर्व आयोग को बसपा का पक्ष भी जानना चाहिए था।
उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2012 में चुनाव आयोग की सख्ती का एक और उदाहरण शनिवार की शाम देखने को मिला जब आयोग ने डीजीपी बृजलाल व प्रमुख सचिव गृह कुंवर फतेह बहादुर सिंह का तबादला करने का आदेश दे दिया।
ज्ञात हो कि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस व भारती जनता पार्टी समेत सभी राजनैतिक दलों ने आरोप लगाया था कि उपरोक्त दोनों अधिकारी व कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह को पद हटाया जाए अन्यथा यह लोग चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं। सभी दलों के साथ आयोग की बैठक में सभी दलों ने उपरोक्त अधिकारियों को हटाने की एक सुर में मांग की।
दलों की मांग को देखते हुए आयोग ने फिलहाल दो अधिकारियों को हटाए जाने के निर्देश दे दिए। आयोग के इस निर्णय को सभी दलों ने सराहा लेकिन बसपा ने इस पर नाराजगी जाहिर की। बसपा की राज्य सलाहकार समिति के अध्यक्ष सतीष चन्द्र मिश्र ने पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा कि यह गलत है आयोग को किसी भी निर्णय से पूर्व सरकार का पक्ष अवष्य लेना चाहिए था। ज्ञात हो कि आयोग ने दिन में ही प्रदेष की विभिन्न पार्को व चौराहों पर लगी मायावती व हाथियों की मूर्तियों को ढकने का आदेष दे दिया था।













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