भारत-पाक संबंधों के लिए बाधा बने पाक सैनिक

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इस्लामाबाद। भारत के पूर्व केंद्रीय मंत्री और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव शशि थरूर ने आज यहां कहा कि भारत और पाकिस्तान में शांति चाहने वालों की अच्छी खासी संख्या होने के बावजूद पाकिस्तान में असैनिक और सैन्य असंतुलन दोनों देशों के संबंधों में बाधक बनने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है। थरूर ने कहा कि पाकिस्तान की विदेश नीति को तय करने में सुरक्षा प्रतिष्ठानों द्वारा निभाई जाने वाली प्रभावशाली भूमिका होनी चाहिए।

शक्तिशाली सेना के जिहादी समूहों से दीर्घकालिक संबंध ऐसे मुद्दे हैं जिनका द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने के लिए निराकरण किया जाना जरूरी है। भारत और पाकिस्तान सहयोग या संघर्ष विषय पर व्याख्यान देते हुए थरूर ने कहा कि पारंपरिक बलों में असंतुलन की भरपाई करने के दौरान भारत को लहूलुहान करने की नीति के तहत पाकिस्तान में मौजूद तत्वों ने लंबे समय से आतंकवादियों और जिहादियों को प्रोत्साहित किया है।

एक अग्रणी विचारक संस्था जिन्ना इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना दुनिया की सर्वाधिक वित्तपोषण हासिल करने वाली सेनाओं में से एक है और उसका नीति पर जबर्दस्त प्रभाव है जबकि किसी भी निर्वाचित असैनिक सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान के हित में नहीं है कि सेना को सकल घरेलू उत्पाद(जीडीपी) और बजट के अनुपात से अधिक हिस्सा मिले। थरूर चार दिन की पाकिस्तान यात्रा पर मंगलवार को लाहौर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि सेना लक्ष्मण रेखा निर्धारित करती है जिसे कोई भी नेता लांघने का साहस नहीं करता।

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