संस्कृत को लोकप्रिय बनाने की जरूरत: सिब्बल

हालांकि संस्कृत के समृद्ध साहित्य और भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए इसे वर्तमान परिदृश्य से जोड़ते हुए आसान रूप में पेश किये जाने की जरूरत है ताकि यह अंग्रेजी के समान सुग्राह्य बने। मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि प्राचीन ज्ञान के छिपे हुए भंडार को छात्रों के समक्ष पेश करने की जरूरत है। भारत सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है, दुनिया के र्कइ देशों में प्रयास हो रहे हैं। 15वें विश्व संस्कृत सम्मेलन का शुभारंभ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया। समारोह की अध्यक्षता मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने की। अंतरराष्ट्रीय संस्कृत अध्ययन संघ और राष्टीय संस्कृत संस्थान ने संयुक्त रूप से 15वें विश्व संस्कृत सम्मेलन का आयोजन किया है जो पांच से 10 जनवरी तक चलेगा।
राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के कुलपति प्रो. राधाबल्लभ त्रिपाठी और अंतरराष्ट्रीय संस्कृत अध्ययन संघ के अध्यक्ष वी कुटुम्ब शास्त्री ने भी समारोह को संबोधित किया। सम्मेलन के दौरान 18 विषयों के तहत चर्चा की जायेगी। इन विषयों में वेद, बहुभाषा अध्ययन, ग्रंथ एवं पुराण, व्याकरण, कविता एवं नाटक, संस्कृत एवं क्षेत्रीय भाषा, वैज्ञानिक साहित्य, बौद्ध अध्ययन, जैन अध्ययन, दर्शन, धर्म का इतिहास, पुरालेख एवं कला इतिहास, संस्कृत प्रौद्योगिकी, आधुनिक संस्कृत लेखन, पंडित परिषद, संस्कृत कवि आदि शामिल हैं। सम्मेलन के दौरान संस्कृत में र्कइ प्रकाशनों का लोकापर्ण भी किया जायेगा।












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