पीएम ने पेश किया विज्ञान का चेहरा बदलने का खाका

अभी तक इस क्षेत्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी कम है। यहां केआइआइटी विश्वविद्यालय परिसर में 99वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां तक संसाधनों का सवाल है, अनुसंधान और विकास पर सकल घरेलू उत्पाद का जो हिस्सा खर्च किया जाता है वह बहुत ही कम है। सिंह ने इस बात पर चिंता जताई कि रोजगार के अवसर कम होने की वजह से बड़ी संख्या में महिला वैज्ञानिक बेरोजगार हैं।
प्रधानमंत्री ने देश के उद्योग जगत से शोध एवं विकास पर खर्च बढ़ाने को कहा, जिससे 12वीं योजना के अंत तक अनुसंधान एवं विकास पर खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के दो प्रतिशत पर करने के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। फिलहाल यह जीडीपी के 0.9 प्रतिशत के बराबर है। उन्होंने कहा कि ऐसा तभी जो सकता है, जब उद्योग इस क्षेत्र में अपना योगदान बढ़ाएं।
आज अनुसंधान और विकास के कुल खर्च का एक तिहाई उद्योग द्वारा दिया जाता है। मेरा मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान और खासतौर से इंजीनियरिंग क्षेत्र की कंपनियों को इसके विस्तार में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। सिंह ने 12वीं योजना के लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि शोध एवं विकास में निवेश में बड़ी वृद्धि को हासिल करना होगा
वैज्ञानिक प्रगति के लिए नया नवप्रवर्तित पारिस्थितिक तंत्र स्थापित करना होगा। प्रधानमंत्री ने मौलिक विज्ञान के क्षेत्र में शोध के बुनियादी ढांचे के विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्र की विकास की जरूरतो के अनुरूप विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र को बेहतर तरीके से जोड़ा जाना चाहिए।












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