यूपी: माया के ऑपरेशन क्लीन से बहे मंत्रियों के आंसू

वर्मा ने जैसे रोना शुरु किया समर्थक पूछ बैठे कि आखिर में उन्हें मंत्रीमंडल से क्यों हटाया गया। उनका दोष क्या था। समर्थकों ने ही वर्मा को हिम्मत दिलाई और उनके आसूं पोछे। वर्मा ने रोते रोते ही कहा कि उनके खिलाफ न तो लोकायुक्त के यहां जांच चल रही है और न ही कोई नोटिस दी गई है। उसके बावजूद उनसे बिना किसी बात का जवाब पूछे बर्खास्त कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो वर्मा गदरौली से दो बार विधायक रह चुके है और इस बार बसपा की तरफ से उनका चुनाव लड़ना संदिग्ध ही माना जा रहा है।
सूत्रों ने बताया कि पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री मायावती ने उन्हें टिकट ना देने का ऐलान भी कर दिया है। वहीं राजनीतिक हलचलों की मानें तो भाजपा का समर्थन वर्मा को मिल रहा है और ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह बीजेपी से चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं सूत्रों का कहना है कि मायावती ने अपना जो चुनावी समीकरण बनाने के लिये सर्वे किया था उसमे वर्मा का हारना लगभग तय था इसलिये मायावती ने उनका टिकट काट दिया है और साथ ही साथ मंत्री पद से भी हटा दिया है।
यह तो बात रही अवधेश वर्मा की मगर कुछ और मंत्री भी है जिन्हें मंत्री पद गवाने के बाद रोना पड़ रहा है। इस सूची में दूसरा नाम है वन मंत्री रहे फतेह बहादुर सिंह। 30 दिसंबर को जब उन्हें मंत्री पद से हटाया गया तो वह भी अपने समर्थकों के बीच रो पड़े। गोरखपुर जिले के कैम्पियरगंज के अपने आवास पर अपने समर्थकों को उन्होंने आगामी रणनीति के लिए बुला रखा था। समर्थकों के बीच आते ही वह रो पडे़ उनका कहना था कि उन्हें बिना कारण हटाया गया है।












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