भाजपा ने टिकट नहीं दिया बसपा में गए वीपी सिंह

डा. वीपी सिंह भाजपा के टिकट पर वर्ष 1996 में स्योहारा सीट से विधायक बने थे। वर्ष 2002 में भी भाजपा ने इन्हें स्योहारा से ही अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन सपा प्रत्याशी कुतुबुद्दीन अंसारी ने उन्हें हराकर इस सीट पर विजय पताका फहराई थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2007 में भी डा. वीपी सिंह ने टिकट मांगा और इस बार भी नई विधानसभा सीट नूरपुर से टिकट की मांग कर रहे थे, लेकिन पिछली बार की तरह इस बार भी पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर दिया और जिलाध्यक्ष लोकेंद्र को प्रत्याशी घोषित किया।
लोकेंद्र के प्रत्याशी बनते ही डा. वीपी सिंह ने बगावती तेवर दिखा दिए थे और लोकेंद्र चौहान का विरोध किया था। माना जा रहा है कि डा. वीपी सिंह को भाजपा के ही कुछ लोग सपोर्ट कर रहे हैं, पार्टी की इस फूट का फायदा उठाते हुए बसपा ने उसका फायदा उठा लिया है। बसपा के सूत्रों की माने तो वीपी सिंह लोकेंद्र चौहान को टिकट घोषित होते ही बसपा सुप्रीमो के संपर्क में थे, जिन्हें मंगलवार को हरी झंडी मिल गई थी। वीपी सिंह के प्रत्याशी घोषित होने के बाद अब इस सीट पर सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि अगर इस सीट से वीपी सिंह भाजपा में अपने समर्थकों को खींचने में कामयाब होते हैं तो भाजपा प्रत्याशी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि इस सीट पर अभी कांग्रेस व रालोद गठबंधन ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। सपा ने पूर्व मंत्री कुतुबुद्दीन अंसारी को इस सीट पर अपना प्रत्याशी घोषित कर रखा है।
कयास लगाए जा रहे हैं कि टिकट कटने से आहत मंत्री यशपाल ठाकुर भी पाला बदल कर सकते हैं। इसके लिए वे अब कांग्रेस गठबंधन पर नजर गढ़ाए हुए हैं। गठबंधन में कांग्रेस ने नगीना, बढ़ापुर और धामपुर सीट पर पत्ते खोल दिए हैं, नूरपुर सीट पर कांग्रेस ताल ठोक रही है। रालोद ने अभी बिजनौर में किसी भी सीट पर अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है।
डॉ वेदप्रकाश सिंह ने बताया कि गुरुवार को नूरपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बसपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी बाबू मुनकाद अली उनके बसपा में शामिल होने की घोषणा करेंगे। उनके समर्थकों ने भाजपा के झंडे बैनर उतार लिए गए तथा बाहर लगे बोर्ड को नीले रंग से पुतवा दिया गया।












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