यूपी चुनाव में होगी राहुल, अखिलेश की अग्निपरीक्षा

परिवार से मिली की राजनीतिक विरासत को राहुल व अखिलेश किस प्रकार संभालते हैं यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा लेकिन जनता के समक्ष उनकी परीक्षा चार फरवरी से शुरू हो जाएगी। कहा जा रहा है कि आगामी विधान सभा चुनाव ही दोनों युवा नेताओं का राजनीतिक भविष्य काफी तक तय कर देगा क्योंकि इस चुनाव में ही 2014 के लोकसभा चुनाव की बुनियाद रखी जाएगी। हकीकत यह है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर ही जाता है।
ज्ञात हो कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने अपनी अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार की कमान संभाल रखी है। कांग्रेस में चुनाव प्रचार का दारोमदार केवल गांधी के कन्धों पर है क्योंकि कांग्रेस में कोई भी ऐसा असरदार नेता नहीं दिखायी देता जिसका जनता से सीधा जुड़ाव हो उधर श्री यादव को उनके पिता से सहयोग मिल रहा है। मुलायम सिंह यादव आगामी एक जनवरी को पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां के साथ आजमगढ़ में एक रैली करने जा रहे हैं। इस रैली में सपा युवराज अखिलेश यादव भी रहेंगे जबकि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने प्रदेश की चुनावी यात्रा शुरू कर दिया है।
चुनाव की घोषणा के बाद अमेठी के सांसद राहुल गांधी का राज्य में यह पहला दौरा होगा जिसमें वह सीतापुर, सहारनपुर में जनसभा के साथ लखीमपुर-खीरी, पीलीभीत, बरेली और शाहजहांपुर में पार्टी के लिए वोट मांगेंगे। राहुल गांधी जहां चुनावी दौर में मायावती पर निशाना लगाकर सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे हैं वही अखिलेश यादव क्रांतिरथ पर सवार होकर कार्यकर्ताओं से कह रहे हैं कि चुनाव की लड़ाई बहुत कठिन है और पूरी ताकत लगाकर राज्य में सपा की सरकार बनवायें।
अखिलेश यादव के लिए बसपा के साथ कांग्रेस भी उनके निशाने पर हैं। यादव का आरोप है कि कांग्रेस सपा को हराने के लिए टिकट बांट रही है। बसपा से मिलकर इस कोशिश में है कि सपा बहुमत में न आने पाये। जबकि गांधी सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के हिन्दी प्रेम पर कटाक्ष कर चुके हैं। उन्होंनें कहा था कि सपा अध्यक्ष दिखावे के लिये हिन्दी से प्रेम दिखाते हैं जबकि अपने पुत्र को पढऩे विदेश भेजते हैं।












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