देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं सिब्बल
चेन्नई।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने आज देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की इच्छा जाहिर की। चर्चित गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की 125वीं जयंती समारोह के उद्घाटन के मौके पर सिब्बल ने कहा कि अभी तक हमारी शिक्षा व्यवस्था सामाजिक तौर पर वर्गीकृत रही है। आईआईएम और आईआईटी जैसे कुछ संभ्रात विश्वविद्यालयों के स्नातक प्रबंधकों के उस वर्ग में शामिल हैं, जो भारतीय राज्य और उद्योग को चलाता है। id="toptextpromo">यह
बदल रहा है और इसे बदलना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की जीत के बावजूद समाज का बड़ा तबका मुख्य तौर पर शिक्षा की कमी के कारण हाशिए पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि कई साहसी शिक्षक इसे बदलने के प्रयास में जुटे हुए हैं, लेकिन वह इसके खिलाफ काम करने वाले लोगों की बड़ी संख्या के कारण अल्पमत में हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मानविकी और सामाजिक विज्ञान के विषयों में गिरावट आ रही है। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>सिब्बल
ने कहा कि इसके लिए सरकार, विद्वानों, व्यवसाय, समाज और नागरिकों को सामाजिक बदलाव और विकास के लिए शिक्षा को लक्ष्य बना कर काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने इस दशक में सकल नामांकन अनुपात को 15 फीसदी से बढ़ा कर 30 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है।यह अनुपात उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या का सूचक है।











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