सरकारी लोकपाल बिल से आम आदमी को नुकसान: अरविंद केजरीवाल

केजरीवाल ने कहा कि इस लोकपाल के मुताबिक सारे सिविलियन पर्सन इस लोकपाल में आयेंगे और केवल 5 प्रतिशत नेता इस बिल में शामिल होंगे। मतलब यह कि सरकार की नजर में केवल देश के लोग भ्रष्ट है और सारे नेता सही। सीबीआई के अधिकारों को भी इस लोकपाल के जरिये छीनने की कोशिश की गयी है।
सरकारी लोकपाल बिल को पोस्टऑफिस की तरह पंगु बताकर केजरीवाल ने कहा कि वो और उनकी टीम इस बिल को सिरे से खारिज करती है। इस बिल से आम आदमी को केवल नुकसान होगा। क्योंकि इस के मुताबिक शिकायत कर्ता के ऊपर तुरंत मुकदमा हो जायेगा जबकि भ्रष्ट नेता को लड़ने के लिए सरकार मुफ्त में खुद वकील देगी। केजरीवाल ने साफ कहा कि हम से पूछा जा रहा था कि अगर लोकपाल भ्रष्ट हो गया तो क्या होगा लेकिन यहां तो खुद सरकार ने भ्रष्ट औऱ पंगु लोकपाल लाने की रूपरेखा तैयार कर दी है।
सरकार के इस नये लोकपाल में केस लड़ने के लिए एक टीम होगी और जांच करने के लिए भी एक टीम होगी। ग्रुप सी के कर्मचारियों को लोकपाल से हटाकर सीवीसी के अंदर दाखिल किया गया है। लोकपाल आठ सदस्यों की एक संस्था होगी जिसमें आधे यानि कि चार सदस्य आरक्षण के माध्यम से चुने जाएंगे। दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को आरक्षण दिया जाएगा। लोकपाल के आधे सदस्य ज्यूडिशियल बैक ग्राउंड के होंगे और पांच सदस्यों की एक कमेटी लोकपाल को चुनेगी।
लोकपाल कमेटी पांच साल के लिए चुनी जाएगी। कमेटी के सदस्यों के चयन की खास प्रक्रिया होगी। चयन प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, नेता विपक्ष लोकसभा, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के साथ ही एक सदस्य की नियुक्ति राष्ट्रपति के जरिए होगी। लोकपाल कमेटी के चेयमैन या मेंबर को तभी हटाया जा सकेगा जब 100 सांसद इसके लिए प्रस्ताव लाएंगे। केजरीवाल ने कहा कि लोकपाल पर पूरी तरह सरकार का कब्जा होगा तो भला सरकार के खिलाफ क्या काम करेगा।
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