नये साल की मस्ती में डूबने की तैयारी में सांसद

सांसदों के करीबियों की मानें तो कई सांसद मन से नहीं चाहते थे कि संसद का शीत कालीन सत्र तीन दिन के लिए बढ़े, क्योंकि सभी सांसदों ने नव वर्ष की मस्ती में डूबने के लिए पहले से ही प्लान बना रखा है। इसलिए कई सांसद 27 से 29 के बीच संसद की कार्यवाही में भाग लेने से कतरा रहे हैं, हालांकि कुछ लोग चाहते हैं कि इसी सत्र में किसी भी प्रकार से लोकपाल बिल पास हो जाए।
सूत्रों ने बताया कि सत्र के बढ़ाए जाने का सबसे ज्यादा मुखर विरोध दक्षिण भारत के कुछ सांसदों ने किया है। वैसे अन्य सांसद भी इसका विरोध कर रहे हैं पर वे आगे न आकर इन्हें ही आगे करके अपना काम निकालना चाहते हैं। सूत्रों ने बताया कि किसी सासंद ने नव वर्ष के लिए आस्ट्रेलिया जाने का प्लान बना रखा है तो कोई गोवा में मस्ती करना चाहता है। किसी ने अपने घर पर ही पार्टी दे रखी है इसलिए कोई भी सांसद मन ने नहीं चाहता कि सत्र 27, 28 और 29 दिसंबर तक बढ़े। सूत्रों ने बताया कि आप इस बात से इनकी गंभीरता के बारे में जान सकते हैं कि देश एक प्रकार से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जल रहा है और ये सांसद महोदय अपने ही रंग में डूबने के लिए तैयार हैं।
बताया जा रहा है कि क्रिसमस के बाद सदन चलाने को लेकर अरुणाचल प्रदेश के सांसदों ने भी विरोध दर्ज कराया है। सांसद चाहते हैं कि सदन को सिर्फ एक दिन यानी 23 दिसंबर तक बढ़ाकर कार्यवाही खत्म कर दिया जाए। हालांकि सरकार के प्रबंधक तर्क दे रहे हैं कि सिर्फ दो दिन में ही लोकपाल पारित हो सकता है। बशर्ते विपक्ष उसे पारित कराने में सहयोग दे। लेकिन सरकारी मसौदा देखने से पहले विपक्ष खास तौर से भाजपा कोई आश्वासन देने को तैयार नहीं है। भाजपा नेतृत्व ने सरकार को साफ कर दिया है कि विधेयक के जिन प्रावधानों पर उसे आपत्ति होगी, उन पर संशोधन लाए जाएंगे। दूसरे विपक्षी दल भी यही तेवर अपनाए हुए हैं।
जाहिर है कि ऐसे में 23 दिसंबर तक विस्तृत चर्चा के बाद लोकपाल पारित कराना संभव नहीं होगा। और अगर आगे बढ़ाये गये दिनों में चर्चा हुई, तो उसमें सांसदों की संख्या में गिरावट दिखाई दे सकती है।












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