यहां पूजा ना करने वाली दुल्हन हो जाती है गूंगी

This is the most Religious Temple of Sirsa
सिरसा। 21वीं सदी में इस प्रकार की खबरें झूठी लगती हैं लेकिन विश्चास सबसे बड़ी चीज होती है और विश्वास अगर हकीकत में बदल जाए तो क्या नहीं हो सकता। ऐसा ही देखने को मिला गांव सुखचैन, कुरंगावाली व गदराना में। इन गांवों में प्राचीन काल से गूंगी माई की पूजा की जा रही है। गांव सुखचैन के निवासी सुखदेव सिंह,जैला सिंह मिस्त्री, चंद सिंह, मोहन सिंह, औम प्रकाश, गुरतेज सिंह, करनैल सिंह आदि ने बताया कि उनकी आयु से पहले ही उनके बुजुर्ग गांव में माई की पूजा करते आ रहे है।

उन्होंने बताया कि गांव में अगर काई भी शादी होती है तो गांव में बने माई के मंदिर मे पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि बारात चढऩे से पहले भी माई की पूजा की जाती है। अगर गांव में कोई नई दुल्हन आती है तो पूजा की जाती है पूजा ना करने पर दुल्हन बोलना बंद कर देती है। इतना ही नहीं गांव में अगर कोई भी मकान, दुकान व रसोई बनती है जो उसके ऊपर माई की एक मटी बनाई जाती है। अगर मटी ना बनाई जाए तो छत गिर जाती है। लोगों ने बताया कि गांव में मटी ना बनाने पर अनेक छते गिरी भी है। उन्होंने कहा कि गांव में आज भी पूरे गांव की ओर से हर माह की सातवे दिन लोग खीर बनाकर माई की पूजा करते है और सारे गांव के द्वारा माई के दरवार में सलाना पूजन भी किया जाता है।

लोगों ने बताया कि गांव के लोग पूरी मान्यता के साथ माई की पूजा करते है। उन्होंने बताया कि जो भी व्यक्ति माई के मंदिर में सच्चे दिल से मन्नत मांगता है वह पूरी होती है। लोगों ने बताया कि एक बार चोर चोरी करने के लिए माई के दरबार में आ गए लेकिन वह मंदिर में बने गुलक को नहीं ले जा सके। उन्होंने बताया कि उन चोरों ने कई जगहों पर चोरी की हुई थी। दूसरे दिन चोरों में आपसी कलह हो गया और झगड़े में वह मारे गए। उन्होंने कहा कि जो भी माई के दरबार में आकर गलत काम करता हे माई स्वयं ही उसको सजा देती है। कारण जो भी हो लेकिन इन गांवो में माई की पूरी मान्यता है।

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