अरुणाचल को मौत और विवादों का मंजर दिखा गया वर्ष 2011

चार दिन के खोज अभियान के बाद उनके हेलीकॉप्टर के मलबे समेत उनका शव चीन की सीमा से लगे लोबोथांग इलाके से पाया गया। इस हादसे से पहले 19 अप्रैल को पवन हंस का एम आई 17 हेलीकॉप्टर भी तवांग के हेलीपैड पर उतरते समय टकरा गया था जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई थी। पूर्वी कमांग जिले में सेप्पा में 29 अक्टूबर को एक पुल टूट जाने से 15 लोगों की मौत हो गई। राज्य के लिये यह साल राजनीतिक उठा-पठक से भरा रहा। खांडू की मौत के बाद उनका पद लेने के लिये दो उम्मीदवार सामने आये। पांच मई को जारबोम गामलिन को मुख्यमंत्री बनाये जाने के बाद राज्य के न्यीशी समुदाय के खिलाफ दो राष्ट्रीय अखबारों में अपमानजनक खबर छपने के बाद तनाव की आंधी उठी।
सरकार के ढुलमुल रवैये से भड़के संगठनों ने आंदोलन तेज करते हुए राज्य भर में बंद और रैलियों का आयोजन किया। इसी तरह के एक आयोजन में 11 अक्टूबर को एक व्यक्ति की जान भी चली गई। इस समुदाय के विभिन्न संगठनों ने संबद्ध अखबारों के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया और राज्य सरकार से इस मामले में कदम उठाने की अपील की। कांग्रेस पार्टी के विधायकों की तरफ से बढ़ते दबाव और राज्य भर में इस आंदोलन के भड़कने के साथ वाहनों की आगजनी, सरकारी सम्पत्ति का नुकसान सामने आने लगा। ऐसे में आला कमान को गामलिन की जगह एक नवंबर को तुकी को मुख्यमंत्री नियुक्त करना पड़ा।
चीन भी इस राज्य पर दावे को मजबूत बनाने की कोशिश में लगा रहा। 12 जनवरी को राज्य के दो खिलाडि़यों को आव्रजन अधिकारियों ने बीजिंग जा रहे विमान में चढ़ने नहीं दिया क्योंकि उनके पास नत्थी वीजा था। अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन जैसे संगठनों ने चीन द्वारा खिलाडि़यों को सामान्य वीजा न जारी करने के संबंध में प्रदर्शन किये। चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ के पुतले फूंके गये और चीनी उत्पादों की बिक्री का विरोध किया गया।
इस तमाम घटनाक्रम के बीच राज्य की महिलाओं ने राज्य का गौरव बढ़ाया। 32 वर्षीय अंशु जामसेनपा दस दिन में माउंट एवरेस्ट की चोटी को दो बार फतह करने वाली पहली महिला बनीं। राज्य की ही एक अन्य महिला तिने मेना ने पर्वतारोहण में एक अनूठा रिकार्ड बनाया। वह दुनिया की पहली ऐसी महिला बनीं जो भोजन के नाम पर सिर्फ आधा पैकट नूडल्स लेकर एवरेस्ट की चोटी पर पहुंची।












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