कोरिया की तर्ज पर विकसित होंगे हरियाणा के गांव

यह भारत को दुनिया का विकसित देश बनने में मदद करेगी। उन्होंने बताया कि 1960 में कोरिया की प्रतिव्यक्ति आय मात्र 78 अमेरिकी डालर थी। जिस तरह से आज अफगानिस्तान दुनिया का चौथा सबसे गरीब देश था उसी तरह से उस समय कोरिया दुनिया का चौथा सबसे गरीब देश था। इसी दौरान प्रेसिडेंट पार्क ने यह अभियान शुरू किया। वह एक मिलिट्री के शासक थे और उन्होंने तय किया कि विकास को शहरों के साथ-साथ गांवों की तरफ लेकर जाना है। उन्होंने बताया कि कोरिया के पास इतना पैसा नहीं था कि प्रत्येक गांव के विकास के लिए लाखों रुपए दिए जा चुके।
ऐसे में उन्होंने न्यू विलेज मुवमैंट के तरह लोगों की गांवों में जाकर कमेटियां बनाई। उन्होंने कहा कि भारत में कोरिया की करीब चार लाख कंपनियां काम कर रही हैं, लेकिन इनकी अधिकतर पकड़ शहरों तक है। ऐसे में इस अभियान के जरिए हम पहली बार इस अभियान को गांवों तक लेकर पहुंचे हैं। इस अवसर पर कोरियाई प्रतिनिधिमंडल में ही यान कांग, ली युंग चोए, सैंग वुक किम, ईयुन जी किम, दुभाषिया रोहित कुमार, प्रोफेसर डू यूंग किंग के अलावा एडीसी रमेश चंद्र बिधान, तहसीलदार सांपला राजेश यालिया, बीडीओ राकेश सिंधू, एएसपी विकास धनखड़, गांव की सरपंच सुनीता देवी, रकीकेष, पूर्व चेयरमैन रूप सिंह, पूर्व सरपंच रणबीर सहित सैकड़ों ग्रामीण भी मौजूद थे।












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