हिंद महासागर में सैन्य अड्डा बना भारत को घेरेगा चीन

संयुक्त राष्ट समर्थित इंटरनेशनल सीबेड अथॉरिटी के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर करके चीन पहले ही हिंद महासागर में अपना कदम रख चुका है। उसके इस अनुबंध का मकसद हिंद महासागर में पॉलीमेटलिक सल्फाइड अयस्क के उत्खनन का अधिकार हासिल करना था। चीन की ओर से अनुबंध पर इसी साल हस्ताक्षर किया गया था। इससे बीजिंग को हिंद महासागर में 10 हजार वर्गकिलोमीटर तक उत्खनन का अधिकार मिल गया है।
चीन के इस कदम पर भारत की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई है। चीन ने हिंद महासागर में सैन्य अड्डा बनाने की घोषणा करके भारत को करारा जवाब दिया है। भारत दक्षिणी चीन सागर में ताइवान के साथ मिलकर तेल और गैस के उत्सर्जन की योजना बना रहा है। जिसका चीन काफी लंबे समय से विरोध करता रहा है। भारत के दक्षिणी चीन सागर में घुसने से पहले ही चीन ने भारत के पड़ोस में हिंद सागर में दस्तक दे दी है। चीन का यह कदम भारत को घेरने वाला भी हो सकता है।












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